मैट्रिक में कर दिया था फेल, अब BSEB को देना होगा 5 लाख का जुर्माना !

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प्रतीकात्मक फोटो

पटना (एहतेशाम अहमद) : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध पटना हाईकोर्ट ने बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए 5 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही साथ अदालत ने तीन माह के भीतर जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया है. जस्टिस चक्रधारीशरण सिंह की एकलपीठ ने प्रियंका सिंह की ओर से दायर रिट याचिका पर गुरूवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता वर्ष 2017 में आयोजित मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुई थी. जिसमें याचिकाकर्ता को संस्कृत में 4 तथा विज्ञान में 29 प्राप्तांक दिखाते हुए असफल घोषित किया गया था. याचिकाकर्ता द्वारा पुनर्मूल्यांकन हेतु आवेदन दिया गया. इसमें भी बोर्ड द्वारा पुनर्मूल्यांकन के बाद संस्कृत में 9 तथा विज्ञान में 7 अंक प्रदान किया गया. जिसके बाद उसने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगायी.

अदालत ने पूर्व की सुनवाई में याचिकाकर्ता को निर्धारित शुल्क 40 हजार रूपये अदालत में जमा करने का निर्देश दिया था. जिसे याचिकाकर्ता ने 22 अगस्त 2017 को जमा कर दिया. अदालत के समक्ष जब याचिकाकर्ता की कापी बोर्ड द्वारा प्रस्तुत की गयी तो उसकी हैंडराइटिंग अलग पाया गया. अदालत के सख्ती बरतने के बाद उसकी मूल काॅपी का पुर्नमूल्यांकन करवाया गया. जिसमें याचिकाकर्ता को विज्ञान में 80 तथा संस्कृत में 61 अंक हासिल हुए.

खुले में मांस-मछली बिक्री पर PMC से जवाब-तलब

एक अन्य मामले में राजधानी पटना में बगैर लाइसेंस और खुले में मांस-मछली के बिक्री किये जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए पटना नगर निगम को दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन एवं जस्टिस डाॅ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने संतोष भारती की ओर से दायर लोकहित याचिका पर गुरूवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना के विभिन्न चौक-चौराहों पर बगैर लाइसेंस के खुले में मांस-मछली की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. जिस कारण जहां एक ओर सरकारी राजस्व की हानि हो रही है वहीं दूसरी ओर उक्त मांस-मछली के प्रदूषित होने के कारण आमजनों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.