कब किस वारदात में कौन था साथ, दुर्गेश ने उगले हैं सारे राज

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पटना : अपराध की दुनिया में कुख्‍यात में अपराधी दुर्गेश शर्मा की लंबी दास्‍तां है. किसी की हत्‍या करनी हो, लूट या डकैती की वारदात हो या फिर किसी बिजनेसमैन से रंगदारी वसूल करनी हो. इन सब आपराधिक वारदातों को दुर्गेश शर्मा एक ठोस प्‍लानिंग के तहत अंजाम देता था. वो खुद इतना शातिर दिमाग का है कि उसे प्‍लानिंग में किसी के साथ की जरूरत नहीं पड़ती थी. लेकिन इसका गैंग बड़ा है, जिसमें कई गुर्गे हैं. जिनसे ये हत्‍या, लूट और डकैती की वारदातों को अंजाम देने के पहले रेकी कराता था और दुकानदारों से रंगदारी की रकम वसूलने में लगाता था.

अब उसके हर एक दास्‍तां से पटना पुलिस रू-ब-रू हो रही है. कब, किस वारदात में कौन अपराधी उसके साथ होता था. किस हथियार से उसने किसकी हत्‍या की थी. हथियार उसे कौन और कहां से लाकर देता था. वो किसके इशारे पर काम करता था. अब इन सारे सवालों का जवाब पटना पुलिस दुर्गेश से पूछ रही है. रविवार को सुबह से लेकर देर शाम तक पटना के डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर डा. मो. शिब्‍ली नोमानी दुर्गेश शर्मा से अपने ऑफिस में ही पूछताछ करते रहे. शुरूआत में तो उसने टाल-मटोल की कोशिश की. लेकिन पुलिस का सख्‍त रवैया देख एक-एक कर सारे सवालों का जवाब दिया और उसने सारे राज उगल दिए.

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नई जगह, नई पहचान और बन गया कांट्रेक्टर

2011 में पटना से फरार होने के बाद दुर्गेश शर्मा ने सबसे पहले बिहार से बाहर अपना नया ठिकाना बनाया. वेस्‍ट बंगाल का सिल्‍लीगुड़ी उसका नया ठिकाना था. यहां आते ही उसने सबसे पहले उसने अपनी पहचान बदली. दुर्गेश शर्मा की जगह राजीव शर्मा के नाम से उसने अपनी नई पहचान बनाई. बतौर कांट्रेक्टर वो कंस्ट्रक्शन के लाईन में आ गया. अपने नए नाम से ही उसने वोटर आईडी कार्ड और दूसरे सरकारी डॉक्‍यूमेंट्स तक तैयार कर लिए. सिल्‍लीगुड़ी के बाद झारखंड का डाल्‍टेनगंज उसका दूसरा ठिकाना था. राजीव शर्मा के नाम से यहां भी उसने अपनी पहचान बनाई.

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जीतू के कंधे पर थी पटना की वसूली

दुर्गेश रह तो रहा था सिल्‍लीगुड़ी और डाल्‍टेनगंज में, लेकिन वहां से बैठकर भी वो पटना में अपनी हुकूमत चला रहा था. उसकी दी हुई जिम्‍मेवारी को उसका राइट हैंड जीतू उपाध्‍याय पूरी ईमानदारी से निभा रहा था. मार्केट से रंगदारी वसूल करने का काम हो या फिर किसी को मौत के घाट उतारने का. दुर्गेश के इशारे पर अपराध की हर वारदात को वो पटना में अंजाम दे रहा था. अब पटना पुलिस की टीम जीतू की तलाश में जुट गई है. जो दुर्गेश के गिरफ्तार होने की खबर सामने आने के बाद से ही अंडरग्राउंड हो गया है.

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दर्ज हुआ नया एफआईआर

फर्जी डॉक्‍यूमेंट्स के जरिए दुर्गेश शर्मा ने अपनी नई पहचान बनाई है, इस बात का खुलासा एसटीएफ की गिरफ्तारी के बाद हुआ. जब एसटीएफ की टीम ने उसके पास से सिल्‍लीगुड़ी के पते पर राजीव शर्मा के नाम से बना हुआ वोटर आईडी कार्ड बरामद किया. एक पल के लिए तो एसटीएफ टीम के भी होश उड़ गए थे. उन्‍हें लगने लगा था कि कहीं कोई गलत व्‍यक्ति को तो अरेस्‍ट नहीं कर लिया गया. लेकिन चंद घंटों में पूरी स्थिति साफ हो गई. अब कोतवाली थाने में फर्जी आईकार्ड के मामले पर नया एफआईआर दर्ज किया गया है.

एक-एक कर खुलेंगे सारे मामले

अकेले पटना जिले में दो दर्जन से अधिक मामले कुख्‍यात दुर्गेश के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज हैं. जिसमें से पटना के 5 थानों में दर्ज 21 एफआईआर की हिस्ट्री सामने आ गई है. सबसे अधिक पाटलिपुत्रा थाने में 7 एफआईआर दर्ज हैं. इसके बाद एसके पुरी में 6, बुद्ध कॉलोनी में 4, कोतवाली में 3 और अगमकुआं थाना में 1 एफआईआर दर्ज है. ये सारे एफआईआर हत्‍या, लूट, डकैती, रंगदारी, और आर्म्‍स एक्‍ट के तहत दर्ज हैं. अब एक-एक कर पटना पुलिस दुर्गेश शर्मा के खिलाफ सालों से पेंडिंग पड़े सारे मामलों को खोलेगी. जोनल आईजी नैयर हसनैन खान के बाद रविवार को एसएसपी मनु महाराज ने भी साफ कर दिया कि सभी मामलों को स्‍पीडी ट्रायल के तहत चलवाया जाएगा.

लगे हाथ लेंगे रिमांड पर

डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर के ऑफिस में हुए घंटों की पूछताछ के बाद शातिर अपराधी को जेल भेज दिया गया. अब पुलिस की टीम उन सभी मामलों की लिस्‍ट तैयार कर रही है, जिसमें दुर्गेश मोस्‍ट वांटेड था. उन सभी मामलों में पटना पुलिस इस कुख्‍यात को रिमांड पर लेगी. सोमवार को पुलिस की ओर से कोर्ट में रिमांड के लिए अपील कर दी जाएगी. एसएसपी मनु महाराज ने भी जल्‍द ही रिमांड पर लेने की पुष्टि कर दी है. 

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