‘योगी’ के एसपी ने बिहार में तोड़ा क़ानून, टोंकने पर पत्रकारों को धमकाया

सासाराम(राजेश कुमार): पूरे देश में 1 मई 2017 के बाद किसी भी गाड़ी में वीआईपी बत्ती लगाना अवैधानिक है. ऐसे में अगर कोई गाड़ी वीआईपी बत्ती के साथ दिख जाए तो हैरत होना स्वा​भाविक है. खासतौर पर तब अधिक जब आपको पता चले कि वीआईपी बत्ती लगाकर चलने वाला कानून का रखवाला है, जो अपनी हनक के कारण कानून को ही ताक पर रखने पर आमादा है.

बताते चलें कि शनिवार शाम रोहतास जिले के अनुमंडल मुख्यालय बिक्रमगंज के बाजार में सिल्वर कलर की इनोवा कार खड़ी थी. कार के ऊपर वीआईपी लाइट भी लगी हुई थी. कार पर वीआईपी लाइट देखकर लोगों में चर्चा हुई और इसी के साथ कई खबरनवीस भी जमा हो गए. कार के पिछले हिस्से में बड़े अक्षरों में लाल रंग से एसपी लिखा देखकर खबरचियों की ओर से भी सवालों के तीर छूटने लगे.

गाड़ी के पास मौजूद वर्दीधारी चालक और हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि यह गाडी संभल(उप्र) के एसपी रवि शंकर छवि की है. वह छुट्टी में अपने गांव सराँव, विक्रमगंज रोहतास आए हैं. उनके घर में शादी होने वाली है, उसी सिलसिले में मार्केटिंग करने के लिए बाजार आए है. इसी बीच कार के मालिक भी आ गए. सादे लिबास में, साधारण कद काठी वाले शख्स की चाल—ढाल तो उनके पुलिस अधिकारी होने की पुष्टि कर रही थी. लेकिन जैसे ही उन्होंने गाडी के पास पत्रकारों का जमघट देखा. एसपी साहब हत्थे से उखड़ गए.


एसपी साहब बोले, आईपीएस हूं और एसपी से पूछने वाले तुम होते कौन हो? चलो डीएसपी के यहाँ बताते हैं. एसपी साहब की गाड़ी डीएसपी के घर की तरफ दौड़ पड़ी. साथ में पत्रकारों का दल भी उनकी गाड़ी के पीछे बाइक से चल दिया. घर पहुंचने के बाद पता चला कि डीएसपी घर पर नहीं थे. उनके हाउस गार्ड ने हिम्मत जटा कर एसपी साहब से कहा कि सर! यहां डीआईजी साहब की गाड़ी से भी बत्ती उतारी जा चुकी है. अब बत्ती लगाकर चलना आपको शोभा नहीं देता. इतना सुनते संभल एसपी ने पत्रकारों को धमकाना शुरू कर दिया. उनकी तमाम बातों को कैमरे और मोबाइल में रिकॉर्ड भी किया गया है. अंत में एसपी साहब के चालक और गार्ड ने उन्हें समझा—बुझा कर गाड़ी में बैठाया और उनके गांव की ओर चलते बने.

सराँव गांव (उक्त एसपी का गांव) के एक व्यक्ति ने बताया कि रवि शंकर छवि उन्हीं के गांव के निवासी हैं. रवि शंकर 2007 बैच के उप्र कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. शादी विवाह के मौके पर गांव–जवार में अपना रुतबा जमाने के लिए फेर में वह भूल गए कि मोटर गाडी अधिनियम में वीआईपी बत्ती वाले प्रावधान को ही समाप्त कर दिया गया है.

अब नीली बत्ती लगा कर चलने वाला दंड का भागी होगा.