अब IAS ब्रजेश मेहरोत्रा भी कभी नहीं खायेंगे चीनी…!

लाइव सिटीज डेस्क: भारत में मधुमेह या डायबिटीज सबसे बड़ी बीमारी बनकर उभरा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है कि 2020 तक इस बीमारी से भारत का हर चौथा शख्स प्रभावित हो चुका होगा. डायबिटीज की बीमारी का मुख्य कारण घरों में इस्तेमाल की जाने वाली चीनी या शक्कर है. पटना में स्टूडेन्टस आॅक्सीजन मूवमेन्ट ने बीते 25 मई को पटना में ‘क्विट शुगर कैंपेन’ शुरू किया था. इस ​अभियान से प्रभावित होकर कई लोग परिवार सहित इस अभियान से जुड़कर चीनी छोड़ने का संकल्प ले चुके हैं. इसी कड़ी में ताजा नाम बिहार के वरिष्ठ आईएएस ब्रजेश मेहरोत्रा का है. अब उन्होंने भी इस अभियान से जुड़कर चीनी न खाने का संकल्प लिया है.

अभियान को लोकप्रिय बनाने के लिए आॅक्सीजन संस्था के कार्यकर्ताओं ने बिहार के कैबिनेट सेक्रेटरी और प्रधान सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग आईएएस ब्रजेश मेहरोत्रा से मुलाकात की थी. आॅक्सीजन के संयोजक विनोद सिंह ने उनसे मुलाकात करके संस्था के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी. विनोद सिंह ने उन्हें बताया कि, गुड़ को सीधे ईख के रस को गर्म करके बनाया जाता है, इसलिए वह प्रकृति के अधिक करीब है और कम हानिकारक है. जबकि चीनी को लंबी रासायनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसलिए उससे शरीर को न सिर्फ डायबिटीज बल्कि हृदय रोग आदि होने की संभावना भी रहती है.

आईएएस ब्रजेश मेहरोत्रा भी विनोद सिंह के विचारों से सहमत दिखे. उन्होंने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए प्रकृति के स्वस्थ विकल्प गुड़ को चीनी से अधिक गुणकारी और फायदेमंद बताया. उन्होंने अभियान को समर्थन देते हुए चीनी को छोड़ने का वायदा किया.

विनोद सिंह ने आईएएस ब्रजेश मेहरोत्रा का क्विट शुगर कैंपेन अभियान में स्वागत किया है.