‘शिक्षक को 7-7 महीने पर वेतन देंगे और कहेंगे कि वो अक्षम है’

पटना : बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के ताजातरीन फैसले लेने के चंद घंटों के भीतर ही उसका विरोध शुरू हो गया है. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि 50 साल की उम्र पूरी कर चुके ‘अक्षम’ शिक्षकों को जबरिया रिटायर कराया जाएगा. यह कवायद इसी साल बिहार के इंटर परीक्षा में आये बेहद खराब रिजल्ट के बाद सूबे की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के मकसद से की जा रही है.

हालांकि सरकार के इस फैसले का तुरंत ही विरोध शुरू हो गया है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने ऐसे किसी भी फैसले को मानने से इंकार करते हुए इसके विरोध की घोषणा की है. संघ के अध्यक्ष केदार नाथ पांडेय ने इसे सरकार का तुगलकी फरमान बताया है. उन्होंने कहा कि शिक्षक अक्षम कभी नहीं होता है. वो जिंदगी भर सक्षम होता है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आप एक शिक्षक को सक्षम बनाने की दिशा में क्या कार्रवाई कर रहे हैं? उसे बदलते परिवेश के अनुसार सतत प्रशिक्षण क्यों नहीं दे रहे हैं?

केदार नाथ पांडेय

पांडेय ने आगे कहा – शिक्षकों को जब तक सभी सुविधाएं नहीं दी जायेंगी, उसे बेहतर माहौल नहीं उपलब्ध कराया जाएगा, तब आप कैसे उनसे बेहतर रिजल्ट की उम्मीद कर सकते हैं. आप एक शिक्षक को 7-7 महीने पर वेतन देंगे और कहेंगे कि शिक्षक अक्षम है. उसे शिक्षण से अतिरिक्त कामों में लगाए रखा जाएगा, तो ऐसे गुणवत्ता नहीं स्थापित हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार गुणवत्ता के लिए इतनी चिंतित है तो अन्य विभागों के भी अक्षम अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती है.

उन्होंने बताया कि अगर सरकार इस फैसले को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी तो माध्यमिक शिक्षक संघ भी आंदोलन करने पर विवश होगा. उधर सरकार के इस फैसले पर संघ के मीडिया प्रभारी अभिषेक सिंह ने कहा कि बिहार में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है. पहले सरकार को उसपर ध्यान देना चाहिए. ऐसे फैसलों से शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं आएगा. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर सरकार अक्षम शिक्षकों को हटाना चाहती है, तो फिर जो शिक्षक सरकार की हर तरह की जांच में खरे उतरे हैं, उनकी भी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिये.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था की आज समीक्षा की. साथ में मंत्री कृष्णनंदन वर्मा और शिक्षा विभाग के अधिकारी थे. चीफ सेक्रेटरी अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद रहे. घंटों चली इस बैठक के बाद यह निर्णय किया गया कि जिन स्कूलों ने बेहद खराब रिजल्ट दिए हैं, उन स्कूलों के वैसे सभी शिक्षकों को ज​बरिया रिटायर करा दिया जाएगा, जिन्होंने 50 साल की उम्र पूरी कर ली है.

बैठक के बाद सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि तीन बार पात्रता परीक्षा में फेल होने वाले नियोजित शिक्षकों को सरकार ने हटाने का फैसला किया है. निकम्मे अधिकारी भी हटाए जाएंगे. दूसरे सभी शिक्षकों की समीक्षा भी होगी. जिन जिलों के रिजल्ट ​अधिक खराब हुए हैं, उनके ​डीईओ पर भी कार्रवाई होगी.

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