हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा : बंद शराब कंपनी के कर्मियों के लिए क्या है राहत पैकेज

पटना (एहतेशाम) : सरकार की नयी शराब नीति के कारण बेरोजगार हुए शराब निर्माता कंपनी के कर्मचारियों के लिए क्या कोई राहत पैकेज उपलब्ध है, इस बारे में चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दिया.



मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खंडपीठ ने मैकडॉवेल वर्कर्स यूनियन की ओर से दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार में शराबबंदी का कानून लागू होने के बाद यहां मोकामा स्थित विजय माल्या की शराब फैक्ट्री में उत्पादन बंद हो गया है. इससे करीब डेढ़ हजार परिवार भुखमरी के कगार पर आ गए हैं. इनको कंपनी अथवा सरकार की ओर से न तो अब तक कोई मुआवजा मिला है और न ही कोई पुनर्वास पैकेज की ही घोषणा की गयी है.

विदित हो कि विजय माल्या के पिता विट्ठल माल्या ने 1973 में यह फैक्ट्री शुरू की थी. उस वक्त यह कंपनी ‘मैकडॉवेल’ के नाम से जानी जाती थी. माल्या की कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स की यह पहली शराब फैक्ट्री थी. फैक्ट्री में सालाना दो लाख कार्टन शराब का उत्पादन होता था. इसमें आधी बिहार में ही बिक जाती थी, जबकि शेष बाहर भेजी जाती थी. लेकिन, बिहार में शराबबंदी के बाद स्थानीय बिक्री अचानक बंद हो गई.

2016-17 के लिए फैक्ट्री को उत्पादन का लाइसेंस मिल चुका था, लेकिन शराबबंदी की वजह से बिक्री बुरी तरह प्रभावित हो गई. कंपनी की पांच करोड़ की शराब बेवरेज कॉरपोरेशन के गोदामों से लौट गयी. फैक्ट्री में उत्पादन बंद होने से इसके कर्मचारियों के समक्ष आर्थिक समस्या पैदा हो गई.

इसके 625 कर्मचारी बेरोजगार हो गए. यहां 175 नियमित और 450 अस्थाई कर्मचारी हैं. आउटसोर्स किए गए कर्मियों की संख्या भी 200 है. फैक्ट्री के माल सप्लाई में 100 से अधिक ट्रकों का इस्तेमाल होता था.

फैक्ट्री से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े डेढ़ हजार परिवार रोजी-रोटी के संकट से जूढने को विवश हो गए हैं.