बिहार में चाहिए शराब तो कहिए- जहांगीर, गफूर …और गांजा बना ‘बेचारा’!

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लाइव सिटीज डेस्क : बिहार में एक साल पहले जैसे ही शराबबंदी हुई, शराब तस्करों की चांदी हो गई. शराब प्रेमियों के लिए तस्करों ने शराब की उपलब्धता और भी आसान कर दी है. बस सही कोड का पता होना चाहिए. आपको यदि शराब का शौक है तो बिहार में कुछ ऐसे कोड वर्ड चलन में हैं जिसे आप जान कर बिलकुल यकीन नहीं करेंगे कि इक कोड से शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है.  

जहांगीर, गफूर, छोटा और बड़ा सिरप यहां तक की ‘नेपाल’ जैसा कोड भी चलन में है. इस कोड का इस्तेमाल कर शराब तस्कर अपनी बिज़नस को आसानी से अंजाम दे रहे हैं.

भोजपुर के एसपी क्षत्रनील सिंह ने भी इस बात को कन्फर्म किया कि कुछ निश्चित कोड वर्ड के जरिये कुछ लोग अवैध शराब के बिज़नस में लगे हुए हैं.  यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक सॉफ्ट ड्रिंक बेचने वाले को गिरफ्तार किया गया. उस पर आरा शहर में अल्कोहलिक पदार्थ बेचने का आरोप लगा था. 

कुछ इस तरह प्रयोग होते हैं कोड

मान लीजिए यदि शराब की बड़ी बोतल चाहिए तो ‘एक लीटर दूध’ कोड का इस्तेमाल करने से आपको शराब उपलब्ध हो जाएगी. यह बात एक पुलिस ऑफिसर ने नाम नहीं छपने की शर्त पर कहा.

वैसे ही अगर भारत में बनी विदेशी शराब (IMFL) चाहिए तो इसके लिए जहांगीर जैसे कोड का इस्तेमाल किया जाता है. यह बातें अररिया के एक शराब तस्कर ने कहा. उसके अनुसार बस सही कोड की जानकारी हो तो शराब मिलना कोई बड़ी बात नहीं है.

सिर्फ जहांगीर ही नहीं फक्करूद्दीन कोड भी खूब इस्तेमाल हो रहा है. इस कोड से कोरेक्स कफ सिरप की उपलब्धता आसानी से हो जाती है.

यह आखिरी कोड नहीं है अगर देसी शराब चाहिए तो ‘गफूर’ कोड का इस्तेमाल कीजिए. वहीं अगर गांजा चाहिए तो ‘बेचारा’ कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन कोड का इस्तेमाल अररिया से 20 km दूर जोकीहत में किया जा रहा है.

अगर जोगबनी या फारबिसगंज की तरफ जाएं तो ‘नेपाल’ कोड भी खूब चलन में है. वहां आपको बस शराब के तस्करों को कहना है कि हम नेपाल घूमना चाहते हैं तो आपके हाथों में IMFL शराब की बोतल थमा दी जाएगी. ‘कोल्ड ड्रिंक’ कोड का भी प्रयोग कर शराब खूब उपलब्ध  हो रही है. 

हालांकि अररिया पुलिस इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर रही है .  जोकीहाट पुलिस स्टेशन SHO हैदरी ने भी अवैध शराब की तस्करी की सूचना से इंकार किया है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कुछ है या शिकायत मिलेगी तो इस पर जरूर कार्रवाई करेंगे.

रोहतास और कैमूर जिले में भी इस तरह के कोड का खूब प्रयोग हो रहा है. इन जिलों में शराब बस एक फ़ोन पर ही उपलब्ध हो जा रहा है. 20 मिनट में ही शराब घर के दरवाजे पर पहुँच  जाती है. ‘फ्रूटी’ कोड से IMFL की बोतल मिलती है तो वहीँ बड़ी और छोटी बोतल के लिए बड़ा- छोटा सिरप का इस्तेमाल किया जाता है.

बता दें कि 5 अप्रैल 2016 से बिहार में लागू हुए शराबबंदी के बाद कई कड़े कानून भी बनाये गए हैं.  शराब बेचना और पीना दोनोको जुर्म मानते हुए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है.

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