संडे को है ‘इम्तिहान-ए-हिंद’ यानि UPSC की PT परीक्षा, सक्‍सेस मतलब वैतरणी पार

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पटना : संडे 18 जून को पूरे देश में यूपीएससी की परीक्षा है. यह परीक्षा है सिविल सर्विसेज की. शुरुआत पीटी से होती है. पीटी के बाद मेंस और फिर इंटरव्‍यू. सक्‍सेस मिली तो आईएएस,आईपीएस, आईएफएस वगैरह-वगैरह बन जायेंगे. कुछ पीछे रहे तो एलायड सर्विसेज की नौकरी मिलेगी. जो भी मिले,मिल गई तो जिंदगी की वैतरणी पार. अब नरेन्‍द्र मोदी ने लाल बत्‍ती उतार दी है,लेकिन बड़े साहब तो कहलायेंगे ही.

पीटी एग्‍जामिनेशन के लिए देश भर के बड़े शहरों में परीक्षा केन्‍द्र बनाये गये हैं. लाखों परीक्षार्थी शामिल होंगे. परीक्षा ठीक ढ़ंग से संपन्‍न हो,इसके लिए सभी लगे हैं. पहले से सेंटरों की तैयारी का निरीक्षण किया गया है. परीक्षा के दिन 18 जून को सेंटर के भीतर किसी को भी मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी. परीक्षार्थी छोड़ दें,सेंटर सुपरिटेंडेंट और ड्यूटी पर तैनात पुलिस वाले व मजिस्‍ट्रेट भी नहीं ले जा सकेंगे. दूसरे इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइस को भी नहीं ले जाना है.

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सबों को पता है कि बिहार के गांवों में भी सभी अपने बच्‍चों से उम्‍मीद करते हैं कि वे यूपीएससी की तैयारी करें. नतीजे आते हैं. पिछले दिनों जब 2016 का फाइनल रिजल्‍ट आया,तब भी देखा गया कि कई ग्रामीण परिवेश वाले परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की. हालांकि पिछले कई वर्षों से यह ट्रेंड देखने को मिला है कि आईआईटी करने वाल स्‍टूडेंट्स भी बाद में आईएएस बनने को बेचैन हो जाते हैं. इनका सक्‍सेस रेट बढ़ा तो दूसरे छात्रों की प्रतियोगिता टफ हो गई.

बिहार में बेटे-बेटी के आईएएस-आईपीएस बनने का मतलब खानदान का तर जाना भी माना जाता है. नई दिल्‍ली का मुखर्जी नगर इलाका आईएएस की तैयारी करने वाले स्‍टूडेंट्स का देश भर में सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है. इस इलाके में भी सबसे अधिक स्‍टूडेंट्स आपको बिहार-यूपी के ही मिलेंगे.

2016 की परीक्षा में सफलता प्राप्‍त करने वाले एक छात्र अपने इंटरव्‍यू का किस्‍सा बता रहे थे. इंटरव्‍यू में एक्‍सपर्ट ने पूछ लिया कि बिहार से हो. किस जाति से हो. शायद उन्‍हें बिहार के चलन का पता था. फिर एक्‍सपर्ट ने कहा – तुमने सक्‍सेस पा लिया तो घर वाले दहेज में कितने रुपये मांगेंगे. सुनते हैं कि करोड़ रुपये तक लोग लेते हैं.

बेचारा छात्र अवाक् था,लेकिन जवाब ऐसे थे कि वह सफलता को चूम गया.