सिर्फ परिवार ही नहीं, दो देशों की मित्रता, संस्कृति व स्नेह का भी मिलन होता है इस छठ घाट पर

सीतामढ़ी (मुकुन्द कुमार अग्रवाल) : भारत-नेपाल की सीमाई क्षेत्र के लोगो की बात छोड़ दें, तो देश के अंदर रहने वालों के लिए किताबों व समाचार पत्रों में छपी दोनों देश के लोगों के बीच आपसी रिश्ते, प्यार, स्नेह की बातें एक रोचक कहानी से कम नही होता है. परन्तु जिन्होंने भी लोग भारत-नेपाल की सीमा पर स्थित सोनबरसा बाजार के निकट झिम नदी पर छठ व्रत को देखा है या देखने आएंगे वे खुली आँखों से दोनों देश के लोगों के बीच आपसी प्रगाढ़ रिश्ते व प्यार को देख कर जरूर सुखद अनुभूति पाएंगे.

सीतामढ़ी जिला के सोनबरसा प्रखण्ड का भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाजार जहां से पहले बाजार के निकट ही झिम नदी की कलकल धारा बहा करती थी. नदी का आधा भाग नेपाल तो आधा भाग भारतीय क्षेत्र में होता था. यहां नदी के दोनों किनारे भारत व नेपाल के श्रद्धालु परिवार  एक साथ छठ पर्व मनाते आये हैं. कुछ वर्ष पूर्व नदी की धारा ने अपना दिशा बदला और नेपाल के सर्लाही के त्रिभुवन नगर की बस्ती के पास से गुजरने लगी. नदी की धारा ने भले ही दिशा बदल लिया हो परन्तु भारत और नेपाल के सीमावर्ती लोगों ने एकसाथ उक्त नदी की घाट पर ही छठ पर्व मनाना जारी रखा.

गुरुवार की संध्या दोनों देश के छठव्रती जब झिम नदी के दोनों किनारे पर अपने-अपने घाटों पर व्रत करने पहुंचेंगे, तब छठ घाट पर नेपाल में बसी बेटी से भारत मे बसी मां का मिलन देख कर सिर्फ धरती पर लोग ही नही आनंदित होंगे, बल्कि ऊपर बैठा ईश्वर भी इस पल का आनंद लेने में नही हिचकेंगे.

बता दें कि इस छठ घाट पर दोनों देश के व्रती रात भी साथ गुजारते हैं. रात को भी एक देश में बसने वाले रिश्तेदार दूसरे देश मे बसे रिश्तेदारों से मिलने उसके घाटों पर जाते हैं. वह पल और ज्यादा सुखद होता है जब भारत या नेपाल में बसी मां या पुत्री, पानी में उतर कर सूर्य को अर्ध्य देते वक्त एक-दूसरे को सुपली हाथों में देते हैं. इस वक्त दोनों देश की सरहद भी कहीं नजर नही आती है. नजर आता है तो बस रिश्तों के बीच प्यार ही प्यार.

इलाके के स्थानीय शिक्षक धीरेंद्र कुमार, निजी शिक्षक प्रमोद कुमार, मनोज कुमार, मो. अकबर, सुरेश साह, राम बहादुर पासवान, विजय राउत, दीपू साह सहित कई युवाओं ने बताया कि हर वर्ष छठ में इस तरह दोनों देश के नागरिक एक साथ छठ पर्व मनाते हैं जिसे देखना बेहद ही सुखद होता है. हम सभी गौरवान्वित हैं जो ऐसे जगह पर रहते हैं जहां आपसी रिश्तों का मिलन इस तरह सुखद अनुभूति प्रदान करता है. वाकई में छठ पर्व इसलिए भी महान है कि इसके बहाने मां से दूर बेटा, पुत्री व पति का भी मिलन हो जाता है. इस अति व्यस्त व टूटते पारिवारिक रिश्तों के बीच परिवारों को जोड़ने का कार्य भी इस महान पर्व छठ में किया जाता है. धरती पर यही पर्व है जो सदियों-सदियों तक एकजुट पारिवारिक रिश्ते को कायम रखेगा.