इस लड़ाई में सब फंसे हैं, सवाल तो BJP में सुशील मोदी से भी पूछा जा रहा है

सुशील मोदी फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्क (रूद्र प्रताप सिंह) : असल मामला यह है-दुश्मनी के रास्ते पर इतनी दूर बढ़ गए हैं कि वापसी के लिए और दोस्ती के लिए भी हाथ मिलाएं तो किससे कैसे और कहां? शायद इसके लिए सबसे मुफीद मौके की तलाश की गई है. वह है राष्ट्रपति चुनाव. इसी बहाने होने वाली बैठकों में इस मसले का कोई हल निकले. बंद पड़े दोस्ती के रास्ते में से कोई गली निकल जाए.

सब फंसे हैं

लोगों को भले ही मजा आ रहा हो. तेजस्वी यादव फंस गए हैं. नीतीश के लिए अपनी छवि बचाना मुश्किल है. भाजपा मजे ले रही है. हकीकत यह है कि पूरे एपीसोड में सबके सब फंसे हुए हैं. राजद यह अपराध अपने माथे पर नहीं लेना जा रहा है कि सरकार उसके चलते गिर जाएगी. जदयू लगातार इस कोशिश में है कि सरकार गिरने का ठिकरा उसके माथे पर न फूटे. कांग्रेस बेलज्जत गुनाह का भागीदार नहीं बनना चाहती है. वह पंचायती करना चाहती है. बड़ी बाधा यह कि उसे कोई पंच मानने को तैयार नहीं है. मीडिया में खबर आई कि सोनिया ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और सीएम नीतीश कुमार से बातचीत की. लालू ने कहा कि उनकी सोनिया से बातचीत नहीं हुई. नीतीश का खेमा चुप रहा. मतलब निकाल सकते हैं कि सोनिया और नीतीश के बीच बातचीत हुई.

चुनाव का बहाने

रविवार को प्राय: सभी प्रमुख दलों ने विधायकों की बैठक बुलाई है. कायदे से सोचिए तो इसकी कोई जरूरत नहीं थी. भाजपा और एनडीए के अलावा जदयू ने रामनाथ कोविंद को वोट देने का फैसला पहले कर लिया है. बड़ी पार्टियों में राजद और कांग्रेस विपक्ष्र की उम्मीदवार श्रीमती मीरा कुमार के पक्ष में है. इसके बावजूद राष्ट्रपति चुनाव के नाम पर बैठक हो रही है. यह औपचारिकता है. यकीन मानिए-इन बैठकों में राष्ट्रपति चुनाव पर कम, बिहार की ताजा राजनीतिक हालातों पर अधिक चर्चा होगी.

सबकुछ फंसा है

सबकुछ फंसा हुआ लगता है. भाजपा बहुत उत्साहित होकर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से इस्तीफा मांगने के लिए सीएम नीतीश कुमार को उत्साहित कर रही है. सच यह है कि भाजपा विधायक दल में इस मसले पर एक राय नहीं है कि सरकार को बचाने के लिए उसे नीतीश कुमार का समर्थन करना चाहिए या नहीं. इस सवाल पर सुशील कुमार मोदी को भी अपनो के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. उनसे सवाल पूछा जा रहा है-नीतीश कुमार के न रहने की हालत में अगर भाजपा को अवसर मिल सकता है तो क्यों उनका सहयोग लिया जाए. यह नहीं है कि भाजपा में सबकुछ सुशील मोदी के कहने से चल रहा है. लालू प्रसाद के खिलाफ घोटालों के नए मामले उजागर करने के लिए उन्हें ख्याति मिल रही है. इसके बावजूद पार्टी के अंदर उनके विरोधियो की तादाद कम नहीं हो पाई है.

यह भी चल रहा है

भाजपा के अंदर यह भी चल रहा है कि सुशील मोदी जितनी विष्फोटक सामग्री राजद के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं, उनकी आपूर्ति जदयू की ओर से ही हो रही है. हिसाब यह बैठ रहा है कि मोदी पहले की तरह नीतीश कुमार की मदद कर रहे हैं. हैरत की बात नहीं कि बैठक में यह मुद्दा उठे कि भाजपा को सहारे के जरिए नहीं, अपने दम पर सत्ता में आने के बारे में सोचना चाहिए.