राज्यकर्मियों को 7वें वेतनमान पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल, 2017 से ही मिलेगा लाभ

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पटना : बिहार सरकार के कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ देने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. राज्यकर्मियों को इस बढे हुए वेतनमान का लाभ 1 अप्रैल 2017 से मिलेगा. हालांकि वैचारिक तौर पर राज्यकर्मियों को इसका लाभ 1 जनवरी, 2016 से देय माना जाएगा. इससे राज्य के करीब 3.5 लाख वर्तमान कर्मियों तथा करीब 6 लाख रिटायर्ड कर्मियों को बढ़े हुए वेतन का लाभ मिलेगा.

मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस समेत 19 प्रस्तावों पर मुहर लगी. बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए मंत्रिमंडल समन्वय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि केंद्र के सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप ही राज्यकर्मियों को वेतनवृद्धि का लाभ दिया जा रहा है. वहीँ वित्त विभाग के प्रधान सचिव रवि मित्तल ने बताया कि इसमें राज्यकर्मियों को बढ़ी हुई दरों पर मिलने वाले भत्तों की गणना अभी नहीं की गई है. भत्तों की गणना सातवें केंद्रीय वेतन आयोग में भी लंबित है. इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने राज्य वेतन आयोग का कार्यकाल अगले दो माह के लिए बढ़ा दिया है. इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है.

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गौरतलब है कि आयोग की रिपोर्ट में भत्ते की चर्चा नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार का भत्ते पर निर्णय आना बाकी है. भत्ते को छोड़ दें तो राज्य कर्मियों के वेतन में 18 से 22 फीसदी तक वृद्धि हुई है. राज्य वेतन आयोग के अध्यक्ष जीएस कंग ने कहा था कि केंद्र की तर्ज पर वेतन में बढ़ोत्तरी होगी. उनके अनुसार कर्मियों के वेतन में 2.57 गुणा तक बढ़ोत्तरी हो सकती है.

5000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
सातवां वेतनमान का लाभ देने से राज्य सरकार के खजाने पर सालाना करीब पांच हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. फिलहाल राज्य सरकार हर माह वेतन-पेंशन मद पर 2200 करोड़ रुपये खर्च करती है. अब उसे हर माह करीब 416 करोड़ रुपये अधिक खर्च करेंगे पड़ेंगे.

नियोजित शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ

कैबिनेट की बैठक के बाद शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने कहा कि राज्यकर्मियों के भत्तों में प्रस्तावित वृद्धि का लाभ भी नियोजित शिक्षकों को मिलेगा. उन्हें राज्यकर्मियों की तरह ही आवासीय व चिकित्सा भत्ता का लाभ दिया जा रहा है.