राजद-कांग्रेस को नीतीश की दो-टूक, ‘बिहार की बेटी’ को हराने के लिए खड़ा न करे विपक्ष

लाइव सिटीज डेस्क: उम्मीद थी कि लालू प्रसाद यादव की इफ्तार पार्टी में सियासत का रंग और गहरा होगा. ​अटकलें सही साबित हुईं और सियासत तेज हो चुकी है. महागठबंधन और विपक्षी एकता के दावे उस वक्त हवा होते नजर आए जब लालू प्रसाद की पार्टी से बाहर आते वक्त सीएम नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में वह खुलकर बोले और कई बातें साफ कर दीं.

जदयू और नीतीश राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविन्द को दिए अपने समर्थन पर अब भी कायम हैं. उनका रुख बदलने वाला नहीं है. यह बात शुक्रवार को लालू प्रसाद की इफ्तार पार्टी से निकलते वक्त दिए हुए उनके बयान से साफ हो गई है. नीतीश शुक्रवार को जमकर गरजे, न सिर्फ गरजे बल्कि बरसे भी. लालू प्रसाद यादव के ऐतिहासिक गलती वाले बयान से अपनी बात शुरू करते हुए उन्होंने कहा कि,” ऐतिहासिक गलती विपक्ष करने जा रहा है, हम नहीं. यह कोई राजनीतिक मुददा नहीं है.

इसे राजनीतिक चर्चा का मुद्दा बनाना भी नहीं चाहिए. जदयू स्वतंत्र राजनीतिक दल है और हम स्वतंत्र फैसले लेत रहे हैं. तब भी, जब हम NDA में थे. प्रणब दा के राष्ट्रपति चुने जाने के वक्त NDA के फैसले के खिलाफ हमने उन्हें वोट दिया था. मेरे दिल में मीरा कुमार जी के लिए बहुत इज्जत है. लेकिन ‘बिहार की बेटी’ को विपक्ष हारने के लिए खड़ा करना चाहता है? ये फैसला कोई अकेले नहीं लिया गया है, बल्कि हर पार्टी के नेता से बातचीत करके और सोच—समझकर लिया गया है. सारे लोग मिलकर 2019 की तैयारी करते और साथ आते तो हम भी उनके साथ होते, लेकिन 2019 के लिए पहली चाल ही गलत चली गई है.”

नीतीश के इन दावों से बिहार की सियासत में उबाल आना तय माना जा रहा है. गौरतलब है कि भाजपा समर्थित एनडीए की ओर से रामनाथ कोविंद की राष्ट्रपति उम्मीदवारी को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद खासकर बिहार की राजनीति गरम हो गई है. गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों द्वारा मीरा कुमार को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद लालू प्रसाद और बिहार कांग्रेस ने भी नीतीश कुमार से अपना फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. हालांकि जदयू ने विपक्ष की इस अपील को खारिज कर दिया था. जदयू ने साफ़ कर दिया कि राष्ट्रपति के लिए कोविंद को समर्थन उनके गुणों के आधार पर है, और यह जारी रहेगा.\

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