रामनाथ कोविंद : कानपुर देहात के छोटे गांव डेरापुर से रायसीना हिल तक का सफर

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लाइव सिटीज डेस्क : रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं. रामनाथ कोविंद को 7,02,044 मिले जबकि मीरा कुमार को मिले वोटों की कीमत 3,67,314 रही. कानपुर देहात के छोटे गांव डेरापुर से रायसीना हिल तक का सफर तय करने वालें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के राजनैतिक सफर पर एक नजर डाल लेते हैं.

रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में हुआ था. बहुत ही संघर्षपूर्ण जिंदगी जीते हुए कोविंद ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई की है. गवर्नर ऑफ बिहार की वेबसाइट के मुताबिक कोविंद दिल्ली हाई कोर्ट में 1977 से 1979 तक केंद्र सरकार के वकील रहे थे. 1980 से 1993 तक केंद्र सरकार के स्टैंडिग काउंसिल में थे.

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रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई. कानपुर नगर के बीएनएसडी से इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीेएवी कॉलेज से बी कॉॅम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की. मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी.

सिविल सर्विसेज
स्‍नातक डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सर्विसेस परीक्षा दी. पहले और दूसरे प्रयास में नाकाम रहने के बाद तीसरी बार में उन्‍होंने कामयाबी हासिल की. कोविंद ने आईएएस जॉब इसलिए ठुकरा दिया क्‍योंकि मुख्‍य सेवा के बजाय उनका एलाइड सेवा में चयन हुआ था.

मोरारजी से नाता
वर्ष  1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बादवे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव भी रहे. बाद में वे बीजेपी से जुड़े. पार्टी की टिकट से वे दो बार चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन दुर्भाग्‍य से दोनों ही बार उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा.

बीजेपी से जुड़ाव
कोविंद वर्ष 1991 में बीजेपी में शामिल हुए. पार्टी के प्रवक्‍ता का पद भी उन्‍होंने संभाला है. कोविंद बीजेपी के दलित मोर्चे के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं. कुष्‍ठ रोगियों के लिए काम करने वाली संस्‍था दिव्‍य प्रेम सेवा मिशन के कोविंद संरक्षक हैं.

राज्‍यसभा से नाता
उच्‍च सदन राज्‍यसभा में 12 वर्ष तक कोविंद बीजेपी का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं. वर्ष 1994 में पहली बार राज्‍यसभा के लिए चुने गए थे. उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं.

राज्‍यपाल
2015 में बिहार के राज्‍यपाल चुने गए. इस दौरान राज्‍य के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बेहतर तालमेल रहा. यही वजह रही कि जब एनडीए ने राष्‍ट्रपति पद के लिए कोविंद की उम्‍मीदवारी की घोषणा की तो नीतीश कुमार ने बेझिझक उनको समर्थन देने की घोषणा की.

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