बिहार के सियासी हालातों पर भाजपा कोर कमेटी में मंथन

पटना (नियाज आलम) : बेनामी संपत्ति को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके दोनों मंत्री पुत्र तेजस्वी और तेजप्रताप यादव व सांसद बेटी मीसा भारती परेशान हैं. उनके ऊपर कसते जा रहे सीबीआई, आईटी और ईडी के शिकंजे से बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है. बदलते राजनीतिक हालातों पर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में भी चर्चा हुई. बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल खुद हिस्सा ले रहे हैं.

संगठन मंत्री रामलाल करेंगे अध्यक्षता

हालांकि पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी की शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक वर्तमान राजनीतिक समीकरण को लेकर नहीं बुलाई गई है. यह पूर्व निर्धारित थी. आज राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राम लाल की अध्यक्षता में बैठक की गई है. बैठक रविवार तक चलेगी. इससे पहले भी मुज़फ्फरपुर में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने कार्यक्रम में भाग लिया था. बैठक में पूर्व निर्धारित एजेंडे के तहत संगठन विस्तार एवं पार्टी की आगामी रणनीति आदि पर चर्चा की गई.

वर्तमान हालात पर होगी चर्चा

प्रेम रंजन पटेल ने यह भी बताया की यह बैठक वर्तमान राजनीतिक उथल पुथल को लेकर नहीं बुलाई गई है. लेकिन इसमें वर्तमान हालात पर चर्चा जरूर की जाएगी. बैठक में प्रदेश भाजपा के सांसद, विधायक, प्रदेश व ज़िला पदाधिकारी भी शामिल रहे. बता दें कि भाजपा नेता सुशील मोदी ने शनिवार को एक बार फिर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके परिवार पर हमला किया है.

नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें तेजस्वी

सुमो ने लालू प्रसाद के ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी के बाद राजद कार्यकर्ताओं द्वारा पत्रकारों पर हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया करवाए. उनके खुद की जान पर खतरे के सवाल पर सुमो ने कहा कि हमें अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत नहीं है. हम तो भगवान के भरोसे अपना काम कर रहे हैं. सुमो यहीं नहीं रुके उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि तेजस्वी यादव को नैतिकता के आधार पर त्याग पत्र दे देना चाहिए.

एनडीए में भी लिए गए थे इस्तीफे

उन्होंने अवधेश सिंह, आर एन सिंह, रामाधार सिंह समेत कई मंत्रियों के नाम भी गिनाए, जिन पर एनडीए के समय आरोप लगते ही उनसे इस्तीफा ले लिया गया था. यह भी कहा कि एनडीए के कार्यकाल में चार्जशीट का भी इंतजार नहीं किया जाता था. आज नीतीश कुमार सीबीआई के FIR और छापेमारी के बाद भी अपनी चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की छवि को देखते हुए उम्मीद किया जा सकता है कि राजगीर से लौटते ही इस मामले में कोई बड़ा फैसला लेंगे.