‘पिछड़ों-अतिपिछड़ों की गर्दन पर तलवार चला रही कांग्रेस और उसके सहयोगी’

पटना : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधने के बाद प्रदेश भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर हमला किया है. पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग के गठन पर कांग्रेस और सहयोगी दलों द्वारा राज्यसभा में अपनाए गए रूख पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता तथा इस्लामपुर के पूर्व विधायक राजीव रंजन ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी पिछड़े-अतिपिछड़ों का विकास नहीं चाहते. वह नही चाहते कि उन्हें नौकरी आदि सुविधाओं में सहयोग मिले.

राजीव रंजन ने कहा कि 1955 से पिछड़ा-अतिपिछड़ा समुदाय के लोगों की यह मांग रही है कि अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग की तर्ज पर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग का भी गठन हो, जिससे वह भी जाति-जनजाति समुदाय के लोगों की तरह समुचित लाभ ले कर देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय को कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने आज तक लटकाए रखा है. आज भाजपा के लाख प्रयास करने के बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दल छोटी-छोटी तकनीकी चीजों को लेकर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग के गठन में अड़ंगा लगा रहे हैं.

राजीव रंजन

उन्होंने कहा कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग में सालाना 50 से 55 हजार शिकायतें आती हैं. संवैधानिक दर्जा न होने के कारण, उनमें से एक प्रतिशत शिकायतों का भी निपटारा नहीं हो पाता और समुदाय के लोग मायूस लौट जाते हैं. राजीव रंजन ने कहा कि राज्यसभा में अपने बहुमत का दुरूपयोग करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगी दल न केवल पिछड़े-अतिपिछड़ों की गर्दन पर तलवार चला रहे हैं बल्कि राष्ट्रहित को भी नुकसान पंहुचा रहे हैं.

पूर्व विधायक ने आगे कहा कि इस अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों का विरोध और उनकी संवेदनहीनता समझ से परे है. एक तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी खुद को पिछड़े-अतिपिछड़ों का सबसे बड़ा हितैषी होने का दावा करते रहते हैं, दूसरी तरफ इनके हित के लिए आयोग के गठन पर अड़ंगा डालने में सबसे आगे रहते हैं.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगी देश के पिछड़े-अतिपिछड़ों को यह बताएं कि उनकी कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों है? आखिर वही इनके कैसे समर्थक है, जो पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करवाने के नाम पर हमेशा पीछे रहते हैं? उन्होंने कहा कि यह किसी से छिपा नहीं है कि अगर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा तो इस समुदाय के लोगों को नौकरी आदि सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी हो जाएगी. इसीलिए कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों के लाख बाधा डालने के बाद भी भाजपा पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग को संवैधानिकता प्रदान करवाने के लिए प्रतिबद्ध है.