‘भ्रष्टाचार पर तब केंद्र के मुखिया मौन थे, आज सूबे के मुखिया ने चुप्पी साध रखी है’

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फाइल फोटो

पटना (नियाज़ आलम) : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की बेनामी संपत्ति को लेकर इस्लामपुर के पूर्व विधायक तथा भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से की. उन्होंने कहा कि लालू परिवार के घोटालों पर नीतीश का मौन यह दर्शाता है कि कुर्सी के लिए नीतीश कुमार ने भ्रष्टाचार से लड़ने की अपनी नीतियों को पूरी तरह तिलांजली दे दी है. बिहार में अभी ठीक वैसी ही स्थिति है जैसी कुछ वर्षों पहले देश में थी. उस समय भी देश में रोज धारावाहिक के नये एपिसोड की तरह नये-नये घोटाले जनता के सामने आ रहे थे, लेकिन ईमानदार माने जाने वाले सरकार के मुखिया उन घोटालों पर हमेशा मौन रहे.

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि ठीक उसी तरह आज बिहार में लालू परिवार की बेनामी संपत्ति को ले कर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. उस समय केंद्र के मुखिया मौन थे और आज सूबे के मुखिया ने चुप्पी साध रखी है. पूर्व विधायक ने कहा कि अपनी छवि को लेकर हमेशा सजग रहने वाले नीतीश कुमार बताएं कि आखिर किसके दबाव में आकर इन घोटालों पर वह चुप हैं. नीतीश कुमार शायद पूरी तरह भूल चुके हैं कि इसी भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए बिहार की जनता ने उन्हें गद्दी पर बिठाया था, लेकिन आज उसी गद्दी के मोह में नीतीश ने लालू और उनके परिवार के घोटालों पर आँखे मूंद ली हैं.

उन्होंने कहा कि यह वही नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने अपनी नीतियों का हवाला देकर कभी जीतन राम मांझी से महज चार घंटो में इस्तीफ़ा ले लिया था, लेकिन आज लालू परिवार के घोटालों पर यह मौनव्रत धारण कर बैठे हुए हैं. हकीकत यह है कि सिर्फ सहयोगी बदलने का असर है. जो नीतीश कुमार भाजपा के साथ रह भ्रष्टाचार के खिलाफ़ धडाधड फैसले लेने में सक्षम थे, वह आज कांग्रेस-राजद के पाले में जा कर कांग्रेसी करप्शन कल्चर के सहभागी हो गए हैं.

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भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त करने वाले कानून की याद दिलाते हुए राजीव रंजन ने कहा कि जब भाजपा सत्ता में सहभागी थी, उस समय बिहार सरकार ने भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त कर उसमे स्कुल खोलने का कानून बनाया था. इस कानून के तहत उस समय त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ संपत्तियां जब्त भी की गयी थी, लेकिन भाजपा के अलग होते ही बिहार सरकार उस कानून के साथ-साथ भ्रष्टाचार से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को भी भूल गयी.

भाजपा नेता ने सवाल किया है कि नीतीश कुमार बताएं कि भाजपा से अलग होने के बाद अभी तक उनकी सरकार ने कितने भ्रष्टाचारियों की संपति जब्त की है.

नीतीश यह भी बताएं कि वह इस कानून का उपयोग लालू परिवार के खिलाफ करने में क्यों हिचकिचा रहे हैं.