सुशील मोदी – ऐतिहासिक भूल, जंगल राज वालों से हाथ मिलाना थी

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फाइल फोटो

पटना : भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के ‘ऐतिहासिक भूल’ वाले बयान पर सवाल उठाया है. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने गुरुवार को दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नसीहत देते हुए कहा था कि वो ऐतिहासिक भूल न करें. लालू ने यह बात नीतीश द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन दिए जाने के संबंध में कही थी.

राजद सुप्रीमो के इसी बयान पर तंज कसते हुए सुशील मोदी ने कहा है कि ऐतिहासिक भूल तो उस दिन हो गई थी, जब (नीतीश ने) जंगल राज वालों से हाथ मिला लिया था. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का समर्थन, उस भूल को सुधारने का पहला मौक़ा है. लालू प्रसाद राष्ट्रपति चुनाव में हारी हुई बाजी पर दांव लगा़ रहे हैं. दलित और बिहार की बेटी की याद उन्हें तब क्यों नहीं आई जब केन्द्र में 10 वर्षो तक यूपीए की पूर्ण बहुमत की सरकार थी. प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और प्रणव मुखर्जी को जब राष्ट्रपति बनाया गया तो दलितों के मसीहा बाबू जगजीवन राम की बेटी को क्यों भूला दिया गया? अगर पिछली बार ही मीरा कुमार को कांग्रेस मौका दे दी होती तो क्या दलित की बेटी के सम्मान से बिहार गौरवान्वित नहीं होता?

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उन्होंने कहा कि आज लालू प्रसाद को दलितों के प्रति जो प्रेम उमड़ा है, जब उनके 15 वर्षों के राज में सैकड़ों दलित गाजर-मूली की तरह काटे गए, तब वे कहां थे? 1996 में बथानी टोला, 1997 में लक्ष्मणपुर बाथे, 1999 में शंकर बिगहा और 2000 में औरंगाबाद के मियांपुर में क्रमश: 22, 58, 22 और 35 दलितों का संहार किसके राज का कलंक हैं?

मोदी ने कहा कि बिहार में जब लालू और कांग्रेस का राज था तो पंचायत के एकल पदों मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष और मेयर के लिए हुए चुनाव में दलितों को आरक्षण से वंचित कर दिया गया था. अब जब दलितों को सम्मान मिल रहा है तो लालू प्रसाद घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना सुनिष्चित है. कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष केवल प्रतिकात्मक विरोध के लिए मीरा कुमार को आगे लाकर एक दलित की बेटी का अपमान कर रहा है. ऐसे में लालू प्रसाद सहित कांग्रेस को कोविंद को समर्थन देने पर पुनर्विचार करना चाहिए.

गौरतलब है कि भाजपा समर्थित एनडीए की ओर से रामनाथ कोविंद की राष्ट्रपति उम्मीदवारी को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद खासकर बिहार की राजनीति गरम हो गयी है. गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों द्वारा मीरा कुमार को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद लालू प्रसाद और बिहार कांग्रेस ने भी नीतीश कुमार से अपना फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी.

हालांकि जदयू ने विपक्ष की इस अपील को खारिज कर दिया था. जदयू ने साफ़ कर दिया कि राष्ट्रपति के लिए कोविंद को समर्थन उनके गुणों के आधार पर है, और यह जारी रहेगा.

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