केंद्र किसानों को दे रहा लाभ, राज्य सरकार भी करें उनकी चिंता : सुशील मोदी

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डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)

पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सोमवार को कृषि को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कई सवाल किये हैं. उन्होंने पूछा है कि कृषि कैबिनेट को क्यों भंग कर दिया गया ? 7 निश्चय में कृषि क्यों नहीं शामिल है? कृषि के बजट में भारी कटौती कयों कर दी गई है? चुनावी साल में धान खरीद पर किसानों को 200 रुपये बोनस देनेवाली सरकार ने इस साल एक पैसा भी क्यों नहीं दिया?

सुशील मोदी ने आगे सवाल किया कि डीजल अनुदान, कृषि यांत्रिकरण, किसान पाठशाला जैसी सारी योजनाएं बुरी तरह से फेल क्यों हो गई? उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री श्वेत पत्र जारी कर बतायेंगे कि दूसरा कृषि रोड मैप (2012-17) क्यों विफल हो गया?

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फाइल फोटो

मोदी ने कहा कि समर्थन मूल्य चाहे जितना भी निर्धारित कर दिया जाए, अगर सरकार किसानों से उनकी ऊपज खरीदेगी ही नहीं तो किसानों को लाभ कैसे मिलेगा? बिहार में इस साल 90 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई, मगर सरकार मात्र 18 लाख मीट्रिक टन की खरीद ही कर पाई. नतीजतन किसानों को अनाज औने-पौने दाम पर बेचने के लिए विवश होना पड़ा.

उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत बीमा कम्पनियों के कार्यकलाप से संतुष्ट नहीं है तो उसे अपनी बीमा कम्पनी खोल कर किसानों के बीमा करने से किसने रोका है? कृषि ऋण के ब्याज पर केन्द्र सरकार 5 प्रतिशत अनुदान देती है जिसके कारण किसानों को मात्र 4 फीसदी ब्याज ही देना पड़ता है. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा आदि कई राज्यों की सरकारें किसानों को ब्याज रहित कर्ज देती हैं.

भाजपा नेता ने याद दिलाया कि एनडीए की सरकार के दौरान बिहार के किसानों को भी ब्याज पर एक प्रतिशत की सब्सिडी दी गई थी जो पिछले तीन साल बंद है. केन्द्र सरकार अपनी अनेक योजनाओं से देश के किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रयासरत है. क्या किसान हितों की चिन्ता करने की जिम्मेवारी राज्य सरकारों की नहीं है?

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