महागठबंधन : चंद्रशेखर बोले ‘आॅल इज वेल’ तो जदयू बोली ‘आरोप नहीं एफआईआर हैं’

लाइव सिटीज डेस्क : कहावत बेहद पुरानी है कि ‘जितने मुंह उतनी बातें’. इस कहावत को आजकल महागठबंधन में चरितार्थ होते हुए देखा जा सकता है. महागठबंधन के भविष्य को लेकर वाकयुद्ध अपने चरम पर है. हर शख्स बयान दे रहा है और हर बयान के मायने अलग हैं. ताजा बयान बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर का है. चंद्रशेखर के मुताबिक महागठबंधन मेंं अब सब कुछ ठीक है.

बुधवार को बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्रियों की बैठक बुलाई गई थी. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की. इस दौरान उप—मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. बैठक के बाद जब सभी बाहर आए तो दिखाने की कोशिश हुई कि महागठबंधन में सब कुछ ‘आॅल इज वेल’ है. राजद विधायक और आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि,’कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप—मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच चर्चा हुई है. अब सब कुछ ठीक है. महागठबंधन में कोई फूट नहीं है.’

लेकिन ये बयान जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक के ताजा बयान से मेल नहीं खाता है. बयानों में विरोधाभास महागठबंधन की उलझी कहानी खुद बयान कर रहा है. जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने चंद्रशेखर के बयान के तत्काल बाद बयान दिया कि,’एफआईआर का जवाब कोर्ट और जनता दोनों को देना होता है. महागठबंधन चलाने की जिम्मेदारी सभी की है. एफआईआर का तथ्यात्मक जवाब आरजेडी को जनता के बीच जाकर देना होगा. ये आरोप नहीं है एफआईआर है.’

सोमवार को राजद विधायक दल और मंगलवार को जदयू के विधायक दल ने अपनी बैठक बुलाई थी. राजद की बैठक का लब्बो—लुआब यही था कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव निर्दोष हैं और वह इस्तीफा नहीं देंगे.

जबकि जदयू की बैठक के बाद साफतौर पर लेकिन बिना नाम लिए कहा गया कि,’जिस पर आरोप हैं वह व्यक्ति जनता की अदालत में जाए और पूरे सबूतों के साथ अपनी बेगुनाही साबित करे.

इन बातों से एक बात तो बिल्कुल साफ है कि महागठबंधन में एकता की कसमें चाहें जितनी खाई जाएं, लेकिन भीतरखाने सब कुछ इतना भी ठीक नहीं है.