उद्घाटन के बहाने लालू-नीतीश बता गये – स्ट्रांग है महागठबंधन का ‘पुल’

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लाइव सिटीज डेस्क : 11 जून. लालू प्रसाद का जन्म दिन. इसी खास दिन पर बिहार को मिली दो पुलों की सौगात. पुल किसके नाम पर हो, इसे लेकर कई दिनों से चल रही थी खींचतान. दोनों जगहों पर महागठबंधन के दोनों बड़े नेता जुटे. भाषणों का भी दौर चला. और, दोनों दिग्गज नेता बात-बात में स्पष्ट मैसेज दे गये कि महागठबंधन पुल की तरह ही काफी स्ट्रांग है. इसे विपक्षी हल्के में न लें. नीतीश कुमार ने तो यहां तक कह दिया कि महागठबंधन को लेकर कोई कन्फ्यूजन में न रहें.

दरअसल पिछले कई दिनों से बिहार में महागठबंधन को लेकर तरह-तरह की खिचड़ी पकती रही है. कभी-कभी तो इसे लेकर पॉलिटिकल कॉरिडोर में ऐसी फुसफुसाहट शुरू हो जाती है कि एक-दूसरे पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है. पिछले कुछ दिनों की बात करें तो महागठंबधन को लेकर अजीब अजीब कयास लगाये जा रहे थे.

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बार-बार उड़ती फूट की हवा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब दिल्ली में आयोजित सोनिया गांधी के कार्यक्रम में शिरकत नहीं की तो महागठबंधन में फूट की हवा उड़ी. इसके ठीक एक दिन बाद नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में पहु्ंच गये तो मीडिया में खबर आने लगी कि कहीं न कहीं कोई बात है. इसके बाद तमिलनाडु में करुणानिधि के जन्मदिन पर नीतीश पहुंचे और बीमार होने के कारण लालू प्रसाद वहां नहीं गये, तब भी मनमुटाव की बातें आने लगीं. इतना ही नहीं, इंटरमीडिएट रिजल्ट को लेकर जब कैबिनेट की बैठक हुई और लालू प्रसाद के दोनों बेटे वहां नहीं पहुंचे, तब एक बार फिर महागठबंधन में ‘खिचड़ी’ पकने की बात होने लगी.

पहले लालू बोले

लेकिन, रविवार को जिस तरह राबड़ी देवी के आवास से लेकर पुल के उद्घाटन स्थल तक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने बातों ही बातों में महागठबंधन से लेकर केंद्र तक पर हमले किये, इससे वे विपक्षियों को मैसेज देने में सफल रहे कि महागठबंधन के ‘पुल’ को कमजोर न समझें. सबसे पहले लालू प्रसाद ने कहा कि नीतीश की चुप्पी पर विपक्षियों का लार टपकते रहता है. टकटकी लगाये रहता है कि अब महागठबंधन तो टूटा. उन्होंने कहा कि अरे भाई कमिटमेंट तो कमिटमेंट होता है. यह टूटने वाला नहीं है. हां, विपक्ष के लोग अपने वोटरों को संतुष्टि के लिए कहते रहता है कि अब तो महागठबंधन टूटा. और, इसे मीडिया भी चलाने लगती है. उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह एकतरफा पंखा नहीं झेलें. जो सही है उसे दिखाएं.

फिर नीतीश ने कहा

कुछ ऐसे ही बयान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम बेवजह कुछ नहीं बोलते हैं. फालतू बातों को जवाब भी नहीं दिया जाता है. इसी चुप्पी से विपक्ष लोगों में कन्फ्यूजन पैदा करता है. लेकिन यह समझ लें कि महागठंबधन में किसी तरह का कोई कन्फ्यूजन नहीं है. बिहार की जनता ने महागठबंधन को मैंडेट दिया है, वह इसी तरह चलता रहेगा. हां, कुछ लोग अपने व्यवहार बदलने वाले नहीं हैं. उन्होंने पुल के उद्घाटन के दिन को लेकर हो रहे विवाद पर भी बोले कि यह बेकार की बात है. दिन को लेकर कोई विद्वेष नहीं होना चाहिए. उन्होंने पुल के नामकरण पर भी कहा कि इसे लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं था. जेपी के नाम पर पुल के नामकरण का डिसीजन काफी पहले लिया गया था, लेकिन रेलवे के लोग इसे भूल गये थे.

नीतीश कुमार ने दो टूक कहा कि दीघा-सोनपुर रेल सह सड़क पुल के निर्माण में लालू प्रसाद का अहम योगदान है. मैंने तो उस समय केवल शिलान्यास किया था. लालू प्रसाद जब रेल मंत्री थे तब उन्होंने इस पुल में काफी महत्वपूर्ण रोल निभाया था.

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