अब नीतीश की चुप्पी टूटने पर ही साफ़ होगी महागठबंधन के भविष्य की तस्वीर

लाइव सिटीज डेस्क : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गहरे संकट में हैं. सीबीआई से लेकर आईटी, ईडी तक उनके सारे ठिकाने न सिर्फ तलाश रही है बल्कि परिजनों से घंटों पूछताछ भी कर रही है. महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार मौन हैं. पहले महागठबंधन के भविष्य को लेकर लोग चुप थे लेकिन उनकी पार्टी जदयू के प्रवक्ता बोल रहे थे. आज लोग बोल रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी से कोई सांस भी लेने को तैयार नहीं है. महागठबंधन के अमर होने की कसमें अब पर्दे के पीछे खाई जा रही हैं, लेकिन आज कोई भी कुछ भी सामने से कहने के लिए तैयार नहीं है.

और नीतीश कुमार चुप हैं…

सीएम नीतीश कुमार मंझे हुए राजनेता हैं. सीबीआई, आईटी के बाद ईडी ने भी लालू प्रसाद के परिवार की संपत्तियों को खंगाला है, लेकिन नीतीश कुमार ने कुछ भी नहीं कहा. इस वक्त नीतीश राजगीर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. वह सुबह घोड़ा कटोरा भी गए थे. उनके साथ में मंत्री श्रवण कुमार भी थे, लेकिन कोई राजनीतिक टिप्पणी उन्होंने नहीं की.

जदयू प्रवक्ता भी खामोश…

इधर पटना में सत्ताधारी जदयू के नेता और प्रवक्ता भी चुप हैं. लालू परिवार पर हुई सीबीआई-ED की रेड को लेकर कोई एक शब्द बोलने को तैयार नहीं है. एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर ने शनिवार को जदयू के तीन प्रवक्ताओ संजय सिंह, नीरज कुमार और अजय आलोक से इस मामले पर बयान लेने की कोशिश की, लेकिन कोई भी इस मामले में मुंह तक खोलने को तैयार नहीं है.

इससे पहले शुक्रवार को ऐसी ख़बरें आई थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर से अपने नेताओं-प्रवक्ताओं को इस मामल में बयानबाजी करने से मना किया है. कुछ भी न बोलने या बहुत सोचसमझ कर बोलने का निर्देश दिया गया है. जदयू नेताओं की इस चुप्पी के पीछे यही वजह मानी जा रही है.

भाजपा का भी बढ़ रहा दबाव

इन सब के बीच राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा की ओर से भी लालू प्रसाद के बेटों तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी लगातार दोनों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं. भाजपा के अन्य नेता भी लगातार नीतीश कुमार पर हमलावर हैं. सीबीआई द्वारा FIR में तेजस्वी और तेजप्रताप का नाम दर्ज किये जाने के बाद नैतिक आधार पर भी उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है.

जनीतिक घटनाक्रम में अभी कई मोड़ आना बाकी है. महागठबंधन के भविष्य पर भी कई कयास लग रहे हैं. लेकिन अभी कोई नहीं कह सकता कि महागठबंधन का भविष्य क्या होगा? महागठबंधन रहेगा या नहीं रहेगा यह भविष्य के गर्त में है लेकिन इस पूरी हलचल ने नीतीश कुमार की सियासत और राजनीतिक समझ की धाक जमा दी है. अब देखना सिर्फ इतना है कि नीतीश कब बोलते हैं और उनके बोलने से जो तूफान आएगा उसकी लहरें कितनी ऊंची उठेंगी?

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