स्पष्ट संदेशा : इस्तीफे से नहीं डरते नीतीश कुमार, बिहार में जदयू रहे सब कुछ के लिए तैयार

nitish

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : जदयू ने इसे जिलाध्यक्षों की बैठक का नाम दिया था. लेकिन, सीएम नीतीश कुमार और सांसद आरसीपी सिंह के भाषण का अंदाज ऐसा था कि सुनने वालों को लगा कि मास्साब क्लास ले रहे हैं. विषय था – भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस . इस विषय पर अलग अलग अंदाज में सीएम बोले और आरसीपी भी. जिलाध्यक्षों ने पाठ से सबक ग्रहण किया – मिड टर्म पोल की तैयारी करनी है. यह भी कि आनेवाले दिनों में जिलाध्यक्षों और पार्टी के दीगर कार्यकर्ताओं का बाजार भाव बढ़ेगा.

सीएम ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में उनका जीरो टॉलरेंस वाला उसूल कायम रहेगा. हालांकि उन्होंने भूल से भी बड़े भाई राजद और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का नाम नहीं लिया, जिनके सीबीआई के चपेट में आने के चलते ही जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी. नीतीश ने कहा कि अब हरेक महीने जिलाध्यक्षों की बैठक होगी. आपलोग सरकार की उपलब्धियों का प्रचार जनता के बीच करें. इसके लिए जिलों में प्रवक्ताओं की नियुक्ति करें. उन्होंने संगठन और प्रचार के मामले में सक्रियता के लिए आरएसएस का उदाहरण दिया. कहा कि आरएसएस के लोग छोटी उपलब्धियों का प्रचार बड़े पैमाने पर करते हैं. आपके सरकार की उपलब्धियां कम नहीं है. आप सब भी इनका प्रचार करें.

संगठन है पेड़ की जड़

नीतीश ने कार्यकर्ताओं खासकर जिलाध्यक्षों को संगठन की जड़ बताया. बोले कि जड़ की महत्ता को साबित करने के लिए ही उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव निशान के तौर पर ‘बरगद के पेड़’ की मांग की थी. पता चला कि यह चुनाव निशान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के किन्हीं सहयोगी की पार्टी का है. हालांकि वह दल चुनाव नहीं लड़ रहा था. फिर भी उसके नाम से बरगद आवंटित था. इसके चलते जदयू को ‘तीर’ निशान मिला. चलिए, यह भी अच्छा है. तीर निशाने पर बैठ रहा है. जदयू के लिए यह निशान भी अच्छा साबित हुआ. उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा के लिए सत्ता में आए हैं. निजी लाभ कभी उनके एजेंडा में नहीं रहा है.

jdu-meeting

कुरीतियों को खत्म किया

सीएम ने कहा कि विकास की रफ्तार तेज हुई तो अच्छी सड़कें बनीं. बड़े-छोटे पुल-पुलिया बने. हमने शराब जैसे घातक कारोबार पर रोक लगाया. इसके चलते सड़क हादसे कम हुए. अपराध कम हुआ. समाज में बड़ा परिवर्तन साफ नजर आ रहा है. अब बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियों पर प्रहार करना है. आप सब और आम जनता के सहयोग से इन कुरीतियों को भी हम खत्म करके चैन से बैठेंगे.

पता है कितनी बार इस्तीफा दिया

आरसीपी ने जिलाध्यक्षों को बताया कि नीतीश कुमार ने कभी भ्रष्टाचार और गलत चीजों को बर्दाश्त नहीं किया. उन्होंने जिलाध्यक्षों से सवाल किया – आपको पता है कि आपके नेता ने कितनी बार इस्तीफा दिया. उधर से जवाब नहीं आया. जवाब आरसीपी ने ही दिया – सात बार. नीतीश कुमार ने केंद्र में मंत्री रहने के दौरान सात बार इस्तीफा दिया. हर बार उनका इस्तीफा वापस किया गया. मैं उनका प्राइवेट सेक्रेटरी था. केंद्र सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया था. मुझे पीएमओ में बुलाया गया. एक अधिकारी ने नीतीश के इस्तीफे की प्रतियां मुझे सौंप कर कहा कि इन्हें अपने साथ ले जाइए.

यह भी पढ़ें –
नीतीश राजद के उमा भारती वाले तर्क से सहमत नहीं, सहयोगियों को जताया इरादा
आगे ‘कत्ल’ की एक नहीं, दो-दो रातें हैं बिहार के हिस्से
महागठबंधन : चंद्रशेखर बोले ‘आॅल इज वेल’ तो जदयू बोली ‘आरोप नहीं एफआईआर हैं’