‘लोकतंत्र लोक-लाज से चलता है, आगे जो भी बिहार के हित में होगा, निर्णय लेंगे’

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को सौंप दिया है. इसके बाद राजभवन से बाहर निकलकर नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी. नीतीश कुमार ने साफ कहा कि मैंने अंतरात्मा की आवाज पर अपना इस्तीफा दिया है. मौजूदा माहौल में काम करना मेरे जैसे व्यक्ति के लिए मुश्किल हो रहा था. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र लोक-लाज से चलता है. जितने लोगों ने अब तक सहयोग किया, उन सबों को मैं धन्यवाद देता हूं. उन्होंने कहा कि आगे जो भी बिहार के हित में होगा, निर्णय लेंगे.

उन्होंने कहा कि जितना संभव हुआ, हमने गठबंधन धर्म का पालन करते हुये बिहार की जनता के समक्ष चुनाव के दौरान जो वादा किया था, उसका क्रियान्वयन करना शुरू किया. सात निश्चय, उस पर अमल करना प्रारंभ किया. बिहार में सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी गयी. शराबबंदी लागू करके और जो कुछ भी काम पहले से चल रहा था, चाहे वह कृषि विकास से संबंधित हो, बुनियादी ढाँचे का विकास हो, सड़क, पुल/पुलिया हो, बिजली का क्षेत्र हो या जन कल्याण का मामला हो, सबके लिये हमने निरंतर काम करने की कोशिश की. निश्चय यात्रा के दौरान क्रियान्वित हो रही योजनाओं को हमने देखा. जन प्रतिनिधियों के साथ हमने चर्चा भी की. जितना भी संभव हुआ, हमने काम करने की कोशिश की. 20 महीना यानी एक तिहाई समय बीत चुका है. इस बीच में जो चीजें उभरकर सामने आयी, उस माहौल में मेरे लिये काम करना संभव नहीं है. यहां क्लिक कर देखें वीडियो भी.

तेजस्वी को देनी चाहिए थी सफाई

हमने कभी किसी का इस्तीफा नहीं मांगा. हमारी लालू जी से बातचीत होती रहती है. तेजस्वी जी भी हमसे मिले थे. हमने उनसे यही कहा कि जो भी आरोप लगे हैं, उसके बारे में एक्सप्लेन करें. आमजन के बीच में जो अवधारणा बन रही है, उसे ठीक करने के लिये एक्सप्लेन करना बहुत जरूरी है लेकिन वह भी नहीं हुआ. धीरे-धीरे माहौल ऐसा बनता जा रहा था और ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गयी कि उसमें काम करना भी संभव नहीं हो पा रहा था.

उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से गठबंधन धर्म का पालन करने की पूरी कोशिश की और जब हमने पूरे माहौल को देखा और उसके बाद मुझको लगा कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिये काम करना संभव नहीं है. यह हमारे अन्तर्रात्मा की आवाज थी. सारी बातें मेरे मन मे चल रही थी कि कोई रास्ता निकल जाय. हमने राहुल गाँधी से भी बात की. बिहार के कांग्रेस नेताओं से भी बात की, उनसे भी हमने कहा कि कुछ ऐसा कीजिये कि सबको एक रास्ता मिले.

नहीं थी संवादहीनता की स्थिति

बिना वजह कि यह बात है कि संवादहीनता है, हमारी लालू जी के साथ, राजद के साथ कोई संवादहीनता नहीं है. हमने अपनी बात कह दी थी, अब उस पर उनको गौर करना था. अब वहां की अपेक्षा होती है कि हम संकट में हैं तो आप रक्षा करें किन्तु यह तो अपने आप लाया हुआ संकट है. उनको वस्तुस्थिति स्पष्ट करना चाहिये. अगर वे वस्तुस्थिति स्पष्ट कर देते तो हमलोगों को भी एक आधार मिलता. हमने इतने दिनों तक इंतजार किया और यह लग गया कि अब वे कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में मैं अब तो जवाब नहीं दे सकता था. जिस सरकार का मैं नेतृत्व कर रहा हूं, उस सरकार के अंदर के व्यक्ति के बारे में कुछ बात कही जाती है तो हम कुछ कहने की स्थिति में नहीं होते. ऐसी स्थिति में सरकार को चलाने का मेरे पास कोई आधार नहीं होता इसलिये मैंने फैसला लिया कि जब तक चला सकते थे, चलाये. अब मेरे स्वभाव और कार्य करने के तरीकों के अनुरूप नहीं है.

कफन में जेब नहीं होती

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप ये सोचिये कि नोटबंदी का मसला आया तो नोटबंदी का समर्थन किया. मेरे ऊपर न जाने क्या-क्या आरोप लगे. और आप भी जानते हैं कि जब हम नोटबंदी का समर्थन कर रहे थे तो हमने साफ-साफ कहा कि बेनामी संपति पर भी हिट कीजिये तो ऐसी स्थिति में हम कैसे पीछे जा सकते थे. हम हमेशा गांधी जी को कोट करते हैं कि इस धरती पर लोगों की जरूरत की पूर्ति तो हो सकती है लेकिन लालच की पूर्ति नहीं हो सकती है. मैं तो हमेशा कहता रहा हूं कि गलत तरीके से धन संपति अर्जित करना सही नहीं है. और बार-बार मैं कहता रहा हूँ कि कफन में जेब नहीं होता. जो भी है, यहीं रहेगा. तब जब हम इस तरह की बात करते रहे हैं तो ऐसी परिस्थिति में आप समझ सकते हैं कि पीछे कैसे हटेंगे.

विपक्ष का न कोई डिसकोर्स है और न कोई अपना एजेंडा

हम तो विपक्षी एकता के पक्षधर हैं किन्तु विपक्षी एकता का कोई एजेंडा होना चाहिये. अभी राष्ट्रपति महोदय के चुनाव के सवाल पर हमने स्पष्ट कहा कि बिहार के राज्यपाल रहे हैं. बिहार के लिये गौरव की बात है कि वे राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. बिहार में उन्होंने अच्छा काम किया है. हमने उनका समर्थन किया, इस बात को लेकर न जाने क्या-क्या आरोप लगाये गये. सभी परिस्थतियों को मैं झेलता रहा हूं. ऐसी परिस्थिति में जब ये वातावरण बन गया हो तो हमारी क्या भूमिका है, हम क्या कर सकते हैं इसलिये मुझको कुल मिलाकर ऐसा लगा कि एक सोच का दायरा भी अलग है. न कोई अपना डिसकोर्स है और न कोई अपना एजेंडा है. रियेक्टिव एजेंडा से काम चलने वाला नहीं है, उसके लिये कुछ बात होनी चाहिये लेकिन उस पर कोई चर्चा इतने दिनों में नहीं हुयी.

हमने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया. अंततोगत्वा जिस बिहार में काम कर रहे हैं, उस बिहार की ऐसी स्थिति हो जाय कि वहां के जनमत में और कोई चर्चा हो ही नहीं रही हो तो ऐसी परिस्थिति में जो हमारी सोच है, उसके अनुरूप हम अपना स्टैण्ड नहीं लेते तो सही नहीं होता. हमने अपनी अंतर्रात्मा की आवाज पर निर्णय लिया कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिये इस सरकार को चलाना संभव नहीं है. इसलिये हमने तय किया कि हम किसी के खिलाफ नहीं बोलेंगे. हमने देख लिया कि कोई रास्ता नहीं है तो तय किया कि खुद ही नमस्कार करो और जगह का त्याग कर दो. अब तक का जो हमारा काम करने का तौर तरीका रहा है, हम उस पर अब तक काम करते रहे. जब हमको दिख गया कि उसके आधार पर आगे काम नहीं कर सकते हैं तो हमने मुनासिब समझा कि अपने आपको अलग कर लो, इसलिये आज हमने अपने आपको अलग कर लिया.

बस अब बहुत हुआ

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल महोदय ने मेरे त्याग पत्र को स्वीकार कर लिया और कहा कि जब तक कोई व्यवस्था नहीं होती है, तब तक काम करते रहें. यह तो एक औपचारिक चीज है. उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, कब होगा, कैसा होगा, आगे के लिये छोड़ दीजिये. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो सरकार है, जिसका मैं नेतृत्व कर रहा था, मुझको यह प्रतीत हो गया कि अब इसके आगे काम करना संभव नहीं है. मेरा कमिटमेंट बिहार के प्रति है, बिहार के लोगों के प्रति, बिहार के विकास के प्रति, न्याय के साथ विकास के प्रति है.

उन्होंने कहा कि मैं किसी को कोई ब्लेम नहीं कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि मैंने पूरा प्रयत्न किया. 15 दिनों में जो भी संभव है, सब तरह से प्रयत्न किया कि कोई रास्ता निकले लेकिन सारी बातें सतही हो रही थी, और वैसी सतही बातों से हम लोगों को फेस नहीं कर सकते. हम लोगों के सामने जायें और अपने मान्यताओं के अनुरूप अपने आचरण को प्रस्तुत नहीं कर सके तो फिर कैसा पब्लिक लाइफ होगा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र लोक-लाज से चलता है. उन्होंने कहा कि जितने लोगों ने अब तक सहयोग किया, उन सबों को मैं धन्यवाद देता हूं. उन्होंने कहा कि आगे जो भी बिहार के हित में होगा, निर्णय लेंगे. उन्होंने कहा कि अपने मूल सिद्धांत के साथ समझौता करना मेरे लिये संभव नहीं है.

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