FSL निदेशक ने अदालत में कहा – विभाग का भवन नहीं, टेंट में हो रहा काम, आदमी भी नहीं

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फोटो स्रोत : Telegraph

पटना (एहतेशाम अहमद) : विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), पटना के पास भवन नहीं है. विभाग अपना काम टेंट में कर रहा है. मैनपॉवर की भी कमी है. इस कारण अपराध के महत्वपूर्ण मामलों में रिपोर्ट देने में देर हो रही है. ये बातें आज शुक्रवार को अपना दुखड़ा रोते हुए FSL विभाग के निदेशक उमेश कुमार सिन्हा ने पटना हाईकोर्ट के सामने कहीं. उन्हें दो साल पहले पटना से गायब हुए एक युवक के मामले में कोर्ट ने तलब किया था.

न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने FSL निदेशक ने कहा कि उनके विभाग में मैनपावर की कमी के कारण रिपोर्ट देने में देरी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि FSL विभाग का भवन भी तोड़ दिया गया है और विभाग का कार्य टेंट में करना पड़ रहा है. हालांकि इस जवाब पर पर अदालत ने उन्हें जमकर फटकार भी लगायी है.

गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व घर से गायब हुए एक युवक के मामले में पटना पुलिस द्वारा युवक की बरामदगी में विफल रहने और गुमशुदा के मोबाईल की FSL जांच नहीं कराये जाने से नाराज पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को विभाग के निदेशक को अदालत में तलब किया था. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया था कि उनका पुत्र विष्णु शंकर दो वर्ष पूर्व घर से अपने दोस्तों से मिलने निकला था. जिसके बाद वह गायब हो गया. काफी छानबीन किये जाने पर जब उसका कहीं पटना नहीं चला तो दानापुर में उसकी गुमशुदगी के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. पुलिस ने उसकी मोटरसाइकिल राजेन्द्र नगर टर्मिनल से बरामद की थी. तब से लेकर आजतक उसका कोई अता पता नहीं चला है.

ब्रह्मेश्वर प्रसाद सिंह की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने सूबे के पुलिस महानिदेशक को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया है.

सासाराम नगर परिषद में LED बल्ब घोटाला मामले में निर्देश

सासाराम नगर परिषद में LED बल्ब घोटाला मामले में आपूर्तिकर्ता द्वारा किये गये LED की जांच कर यदि नियमानुसार आपूर्ति हुई है तो बकाया राशि का 80% अदा करने और यदि आपूर्ति सही नहीं हुई है तो अदा की गयी राशि को वसूल करने का निर्देश नप के चेयरमैन को पटना हाईकोर्ट ने दिया है. न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने राजेश कुमार यादव की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उसे निविदा के निर्धारित मापदंडों के अनुरुप टेंडर के लिए आवेदन किया था. जिसके बाद उसे नगर परिषद क्षेत्र में 672 LED लगाने का कार्यादेश मिला और उसने निर्धारित समय में बजाज कंपनी का LED लगाया. परंतु उसे सिर्फ 400 LED का 80 प्रतिशत भुगतान किया गया है.

वहीं इस मामले में सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उक्त निविदा में घोटाला किया गया है, और बाजार की कीमत से काफी उंची कीमत LED की खरीदारी की गयी है. इस मामले में निगरानी विभाग द्वारा तत्कालीन नप अध्यक्ष के अलावा कई लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है, जिसमें तत्कालीन नप अध्यक्ष को जेल भी भेजा गया है.

मगध विश्वविद्यालय को निर्देश

एक अन्य मामले में मिर्जा गालिब टीचर्स ट्रेनिंग में M. Ed. पाठ्यक्रम को NCTE द्वारा मान्यता दिये जाने के बाद भी मान्यता नहीं देने से नाराज पटना उच्च न्यायालय ने मगध विश्वविद्यालय को चार सप्ताह के भीतर मान्यता देने और महाविद्यालय को स्वीकृत 50 सीट पर नामांकन लेने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश चक्रधारीशरण सिंह की एकलपीठ ने मिर्जा गालिब टीचर ट्रेनिंग कालेज की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि महाविद्यालय M. Ed. कोर्स में पढ़ाई के लिए सभी निर्धारित अहर्ता रखता है. इसके लिए NCTE द्वारा महाविद्यालय का निरीक्षण कर इस कोर्स को शुरु करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. परंतु मगध विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्रदान नहीं किया जा रहा है.

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