नाराज मांझी पहुंचे दिल्ली, कहा- मेरी हैसियत रामविलास से कम है क्या…

लाइव सिटीज डेस्कः बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी नाराज हैं. उन्होंने दिल्ली के बिहार निवास में डेरा डाल लिया है. वह भाजपा के केंद्रीय नेताओं से बात करेंगे. रामविलास पासवान के भाई पशुपतिनाथ पारस को मंत्री पद मिलने से जीतन राम मांझी ज्यादा नाराज हैं. उनका कहना है कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा भाजपा के सहयोगी दल है. क्या उनकी हैसियत रामविलास पासवान से कम है.

मांझी ने रामविलास पासवान पर तंज कसते हुए कहा कि रामविलास पासवान की राजनीतिक भूख अभी गई नहीं है. मांझी ने कहा कि पासवान ने पूरे परिवार के साथ सीएम के यहां जाकर मंत्री पद की मांग की. क्या यही राजनीति रह गई है.

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष जीतनराम मांझी ने कहा है कि लोजपा के खाते में एक मंत्री पद दिया गया लेकिन हमें एक भी नहीं. हमें कमजोर समझकर सताया गया है. मांझी ने आगे कहा कि जो पहलवान है उसको घी, दूध, मलाई दिया जा रहा है लेकिन जो कमजोर है, उसे कुछ भी नहीं दिया गया. आखिर एक ही गठबंधन में दो पार्टियों के साथ अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है.

दरअसल, लोजपा कोटे से पशुपति कुमार पारस को मंत्री बनाया गया है. लेकिन फिलहाल वे किसी भी सदन के सदस्‍य नहीं हैं. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी अपनी पार्टी से इसी तरह के तीन लोगों के नाम भेजे थे, लेकिन बात नहीं बन सकी. इस बात को लेकर मांझी ने अपनी नाराजगी एनडीए के केन्द्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दी है.

नीतीश की कैबिनेट में भाजपा के अलावा एनडीए के घटक दल रालोसपा, हम और लोजपा को भी जगह देने पर सहमति बन गई थी. तीनों पार्टियों के कोटे से एक-एक मंत्री बनाया जाना था. विधानसभा में लोजपा व रालोसपा के दो-दो एवं हम के एक सदस्य हैं. मांझी ने गुरुवार को खुद मंत्री बनने से इन्कार कर दिया था और पार्टी के तीन लोगों के नाम भेजे थे. उन्होंने लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस के नाम पर विरोध भी जताया था.

मांझी को मनाने सुशील कुमार मोदी, नित्यानंद राय और नंद किशोर यादव शाम को उनके आवास पर पहुंचे थे, मगर मांझी नहीं माने. लोजपा कोटे से विधायक राजकुमार साह व राजू तिवारी और विधान पार्षद नूतन सिंह को मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी द्वारा पशुपति कुमार पारस का नाम भेजा गया. किसी भी सदन के सदस्य न होने के बाद भी पारस के नाम पर मुहर लग गई. उनको अगले छह माह में सदन का सदस्य बनना होगा.

यह भी पढ़ें-

हो गया शपथ ग्रहण, बिहार को ‘सुशासन’ देंगे नीतीश-मोदी के 26 मंत्री

पारस की खुल गई लॉटरी : मांझी अब भी फोन करेंगे, कुशवाहा पंखा चलायेंगे

पासवान ने ‘फैमिली पॉलि​टिक्स’ में पछाड़ दिया लालू को

मांझी के बाद अब उपेंद्र कुशवाहा की टीम कैबिनेट से बाहर, नहीं माने नीतीश