‘सुप्रीम’ फैसला : शराब कंपनियां अब सूबे के बाहर ले जा सकेंगी स्टॉक, बेचने की मिली इजाजत

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लाइव सिटीज डेस्क : बिहार की शराब कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. इस सुप्रीम फैसले से बिहार की शराब कंपनियों को काफी राहत मिली है. अब वे अपने स्टॉक में बची करोड़ों की शराब को बिहार के बाहर ले जा सकेंगी और से बेच भी सकेंगी. बता दें कि पिछले एक साल से शराब कंपनियां अपने स्टॉक को लेकर परेशान थीं.

गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद कई कंपनियों के स्टॉक में करोड़ों की शराब रह गयी थीं. यह शराब लगभग 200 करोड़ की थी. पहले शराब कंपनियां स्टॉक को खपाने के लिए पटना हाइकोर्ट से अनुमति मांगी थी. जब यहां बात नहीं बनी तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट से शराब का स्टॉक खत्म करने के लिए कंपनियों को पहले 31 मार्च तक का समय दिया गया. फिर कंपनियों के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट में 29 मई को सुनवाई हुई. शराब कंपनियों की ओर से अमित सिब्बल द्वारा दायर याचिका पर जस्टिस एल नागेश्वर राव और नवीन सिन्हा के खंडपीठ ने कंपनियों को और दो माह की मोहलत दी. स्टॉक को खत्म करने के​ लिए 31 जुलाई डेडलाइन निर्धारित कर दी.

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इधर शराब कंपनियां कन्फ्यूजन में थी. कन्फ्यूजन यह था कि स्टॉक को खत्म करने के सुप्रीम कोर्ट ने मोहलत दी थी, लेकिन कंपनियां शराब के स्टॉक को बिहार के बाहर खपाना चाहती थीं. इसी को लेकर वे सब मंगलवार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची. उन्होंने स्टॉक में बची करोड़ों की शराब को सूबे के बाहर ले जाने और बेचने की अनुमति मांगी. कंपनियों का कहना था कि स्टॉक खपाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह क्लियर नहीं था कि शराब को खत्म करना है कि उन्हें स्टेट से बाहर ले जाना है. मंगलवार को तो सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. उम्मीद थी कि इसकी सुनवाई बुधवार को हो, लेकिन नेक्स्ट डे भी खाली ही गुजर गया.

इसी बिंदु पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. इसमें कंपनियों को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अपने 29 मई के फैसले में थोड़ा संशोधन किया है. 29 मई को अपने फैसले में कोर्ट ने शराब के स्टॉक को खत्म करने के लिए दो माह की और मोहलत दी थी. पहले कंपनियों को स्टॉक नष्ट करने के लिए 31 मई तक का समय मिला था. इसके बाद इस डेडलाइन को बढ़ा कर 31 जुलाई कर दी गयी. अब इसमें संशोधन होने से डेडलाइन तो वही रह गयी, लेकिन अब कंपनियां शराब के स्टॉक को सूबे के बाहर ले जा सकेंगी और उसे निर्यात भी कर सकेंगी.

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