Topper Scam : नेताजी की ‘फर्जी फैक्ट्री’ लेती थी फर्स्ट क्लास का ठेका

पटना : बिहार सरकार और बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश कुमार को सही ठहराने की जितनी कोशिश कर ले, सबूत ठहरने नहीं देंगे. लाइव सिटीज की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने सिर्फ अनुसंधान किया है. आगे जो आप देखने-पढ़ने जा रहे हैं, वह सबकुछ बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड का रिकॉर्ड है. ये रिकॉर्ड ही सिद्ध करेंगे कि 2017 की परीक्षा में फर्स्ट क्लास की ठेकेदारी से स्कूलों को बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड रोक नहीं पाया था.

आज के अनुसंधान में लाइव सिटीज सारा कच्चा-चिटठा समस्तीपुर के उस रामनंदन सिंह जगदीश नारायण इंटर स्कूल का ही खोलने जा रहा है, जिसके डर्टी बिज़नेस पर अब भी पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है. लाइव सिटीज आपको पहले पब्लिश रिपोर्ट में बता चुका है कि यह स्कूल भाजपा के नेता जवाहर प्रसाद सिंह और उनके प्रिंसिपल बेटे अभितेंद्र कुमार का है.

सिर्फ लाइव सिटीज ने नहीं, आज गुरुवार को देश-दुनिया की मीडिया ने समस्तीपुर के स्कूल में प्रकट हुए टॉपर गणेश कुमार को जांचा-परखा. ख़बरों में पूरी दुनिया ने देखा कि टॉपर गणेश कुमार को संगीत का बेसिक नॉलेज भी नहीं है.

सवालों से लथपथ गणेश ने स्वयं स्वीकारा भी. कहा – इतना नंबर कैसे आ गया, हमें खुद नहीं पता. फिर भी सरकार और बोर्ड का कहना है कि टॉपर के रिजल्ट में कोई झोल नहीं है. मालूम हो कि गणेश को 100 अंकों के संगीत की परीक्षा में कुल 83 अंक मिले थे, जिनमें प्रैक्टिकल का 65 नंबर भी शामिल है.

सरकार और बोर्ड के दावे को मान भी लें, तो क्या इसे भी स्वीकारा जा सकता है कि समस्तीपुर का यह स्कूल गली-गली में देश के महान संगीतज्ञ शंकर महादेवन, बप्पी लहरी, हिमेश रेशमिया, ए आर रहमान और अदनान सामी की परंपरा में नए पौध को सींच रहा था. लाइव सिटीज की टीम बोर्ड के दस्तावेजों के आधार पर ही इसे मानने को तैयार नहीं है. स्कूल के प्रिंसिपल अभितेंद्र के बार-बार बदले बयान ने फर्स्ट क्लास की ठेकेदारी के धंधे को और स्पष्ट कर दिया है.

प्रिंसिपल अभितेंद्र ने बुधवार को लाइव सिटीज को बताया था कि इंटर टॉपर गणेश को संगीत में विशिष्टता प्रदान करनेवाली शिक्षक कोई भारती दी थीं. आज गुरुवार को मीडिया ने जब भारती दी का परिचय पूछा, तो नए टीचर का नाम सामने आ गया. कहा गया कि संगीत की टीचर रूपम दी हैं, वह भी परमानेंट नहीं, बल्कि गेस्ट टीचर.

आगे आपको समस्तीपुर के सुदूर देहात के इसी स्कूल के 15 और परीक्षार्थियों के मार्कशीट दिखाते हैं. इसे लाइव सिटीज ने एग्जामिनेशन बोर्ड के पोर्टल से ही प्राप्त किया है. आज टॉपर गणेश कुमार का मार्कशीट नहीं दिखा रहे, क्योंकि वह आपसब देख चुके हैं. लेकिन दिखाए जा रहे सभी मार्कशीट गणेश के आसपास के ही रोल नंबर के हैं.

सभी के सभी संगीत में आपको टॉप दिखेंगे, क्योंकि यह स्कूल तो बिहार से भविष्य का शंकर महादेवन और हिमेश रेशमिया पैदा कर सकता था. दुर्भाग्य तो कुछ छात्रों के साथ बस इस बात का रहा कि जिन विषयों में परीक्षा देनी थी, उस दिन परीक्षा केंद्र पर सख्ती हुई, स्कूल की सेटिंग नहीं चली और फेल हो गए. पर, स्कूल तो लिए ठेके के हिसाब से सबों को संगीत में डिस्टिंक्शन दिला ही रहा था. आगे आप 1-1 कर सभी 15 मार्कशीट को देखते चलें.

-अर्जुन कुमार के मार्कशीट को. देखा न, बाकी सारे विषयों में कितने नंबर मिले हैं, लेकिन संगीत में कुल 76. 11 थ्योरी के और 65 प्रैक्टिकल में. संगीत की पढ़ाई तो हिंदी में ही होती थी, लेकिन अर्जुन जी सामान्य हिंदी की परीक्षा में भी पास नहीं कर पाए. यह डर्टी बिज़नेस नहीं तो और क्या है?

-चंदन कुमार का मार्कशीट है. बहुत कमाल का मार्कशीट है. चंदन को न हिंदी आती है, न अंग्रेजी आती है, लेकिन संगीत में 78 नंबर मिलते हैं. 65 प्रैक्टिकल में और 13 थ्योरी में. क्या इसे भी आप परीक्षा की शुद्धता कहेंगे?

-मार्कशीट दूसरे चंदन कुमार का है. बहुत काबिल हैं. स्कूल संगीत का भगवान बनाता क्या? हिंदी में मात्र 6 नंबर, क्या बात है? लेकिन संगीत का कमाल देखिये. चंदन को 79 नंबर मिल जाते हैं. 66 प्रैक्टिकल में और 13 थ्योरी में.

ये बिट्टू झा जी का मार्कशीट है. वैसे कुल जमा तौर पर वे पढ़ने में ठीक दीखते हैं, क्योंकि दूसरे सब्जेक्ट में भी नंबर आया है. पास किये हैं. फर्स्ट डिवीज़न से. लेकिन यहां भी संगीत का खेल है. सबसे अधिक नंबर 80 संगीत में ही. यदि संगीत में 80 नंबर न मिलते, तो यह फर्स्ट क्लास नहीं होता.

-मार्कशीट बिक्की साफी का है. कहानी बहुत साफ़ है. समझिये, ये भी हिंदी में फेल हैं. लेकिन संगीत में ऐसी विशिष्टता है कि 83 नंबर आ गए. बिना खेला संभव है क्या ये?

-अरविंद कुमार का मार्कशीट है. कंपलसरी सब्जेक्ट में ही फेल कर गए, वजह कि 50 नंबर के एक पेपर में मात्र 8 नंबर आया. लेकिन संगीत तो बमबम है. कुल 75 नंबर. यह भी बिना खेला का है क्या?

-ललित कुमार राम का मार्कशीट आप देख रहे हैं. ये भी 50 नंबर के पेपर में 15 नंबर लाकर पास नहीं होते हैं. पर, स्कूल उनके भीतर महान संगीतज्ञ बनने का गुण देखता है. परिणाम संगीत में 79 नंबर मिल जाते हैं. इसे आप क्या कहेंगे?

-अमरजीत पासवान का मार्कशीट आप देख रहे हैं. चौंकिए नहीं, जनाब को सबसे अधिक संगीत में ही 76 नंबर मिले हैं. बदकिस्मती यह रही कि कंपलसरी सब्जेक्ट में फेल कर गए.

मनीष कुमार का मार्कशीट ऊपर आप देख रहे हैं. कितना टैलेंटेड हैं, समझिये. अनिवार्य विषय में 100 में 15 नंबर लाकर फेल होते हैं. हिस्ट्री में भी फेल हैं. लेकिन मैनेजमेंट ने तो ठेके के तहत मनीष को संगीत में सबसे अधिक 74 नंबर दिला ही दिया था.

-मार्कशीट कुंदन कुमार राय का है. फिर वही कहानी. अनिवार्य विषय में फेल. पर फर्स्ट क्लास का ठेका लेनेवालों ने तो संगीत में कुंदन को 78 नंबर दिलाकर अपने वायदे को पूरा कर ही दिया था. आगे न हो पाया, तो यह बदकिस्मती ही थी.

-दीपेन्द्र कुमार मालाकार हैं. खुशकिस्मत हैं कि परीक्षा पास कर गए हैं. फर्स्ट क्लास से 9 नंबर से चूक गए. स्कूल और एक्सपर्ट ने दीपेन्द्र को संगीत में सबसे अधिक 78 नंबर दिया था.

ये दीपक राम हैं. सबसे अधिक संगीत में इन्हें भी नंबर मिला. कुल 81. थ्योरी में 15 और प्रैक्टिकल में 66. अब किस्मत ही खराब थी तो क्या कहें, अनिवार्य विषय में क्रॉस लग गया और परीक्षा में फेल कर गए.

– दीपक कुमार हैं. म्यूजिक में टॉप कराना तय था. तभी तो डिस्टिंक्शन का नंबर 78 दीपक को मिला. दुर्भाग्य ये रहा कि न हिंदी आती थी, न अंग्रेजी. और परीक्षा में हो गए फेल.

-छोटन राम का मार्कशीट है. ये छोटन राम भी म्यूजिक में बमबम हैं. एक्सपर्ट ने छोटन के भीतर संगीत का गुण देखा होगा तभी तो प्रैक्टिकल में 65 नंबर दे दिए थे. थ्योरी के 15 नंबर मिलाकर हो गए 80. लेकिन दूसरे विषय ने ले डूबा और परीक्षा में हो गए फेल.

ये विंदु कुमारी का मार्कशीट है. परीक्षा में पास हुई हैं. इन्हें भी सबसे अधिक 82 नंबर संगीत में ही मिले हैं. हिंदी में तो किसी तरीके से पास हुई. पर एक्सपर्ट ने विंदु के मन का संगीत पढ़ लिया था, इसलिए प्रैक्टिकल में 66 नंबर दे दिया. थ्योरी में 16 नंबर आये थे.

अब इन 15 मार्कशीटो को देखकर आप खुद फैसला कीजिये कि इंटर आर्ट्स के टॉपर के रिजल्ट का सच क्या है. जिस संगीत को वह जानता नहीं, स्वयं भी कबूल कर रहा, उसमें 83 नंबर आते हैं. अब यदि खेला है, जो साक्ष्य कह रहे हैं, तो टॉपर का रिजल्ट फर्जी हुआ न. मतलब साफ़ है कि गणेश के बहाने सिस्टम ने दूसरे टॉपर के हक़ की हकमारी कर दी है.

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