सचमुच आरा-छपरा हिल गया, मुंगेर-मोतिहारी का संदेश भी कड़ा है

पटना : सोमवार 31 जुलाई का दिन बिहार में तबादलों का दिन था. थोक भाव में सरकार ने आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के तबादले किये. बिलकुल अपनी मर्जी से नीतीश कुमार ने. लालू प्रसाद अब दखल देने के लिए सरकार में नहीं थे. भाजपा कुछ तय करती, इसके पहले सरकार ने फैसले कर लिए. कई तबादलों को पढ़ें जाने की जरुरत है. जब इसे पढ़ेंगे, तो दिखेगा कि अधिकारियों की तैनाती में लालू प्रसाद कितने बड़े रोड ब्लॉकर थे. पर अब नीतीश कुमार ने ‘गुड गवर्नेंस’ की प्रायोरिटी के तहत फैसले किये हैं. इफ़ेक्ट जल्द दिखेगा.

वैसे यह दूसरी बात है कि तबादलों का सबसे बड़ा फैसला अधर में लटक गया है. भाजपा के साथ नई सरकार ने सबसे पहले सूबे के बालू माफिया के खिलाफ जंग का निर्णय लिया. पटना में मनु महाराज निकले, तो भागलपुर में विकास वैभव चल पड़े. अब सरकार को खान एवं भूतत्व विभाग को देखना था. सरकार ने बिहार के सबसे कड़क आईएएस के के पाठक को प्रधान सचिव बनाने का फैसला किया. खबर आते ही बालू माफिया का सिंडिकेट होश खोने लगा. लेकिन यह क्या, 24 घंटे के भीतर ही पाठक ने नई जिम्मेवारी को ग्रहण करने से इंकार कर दिया. सरकार के लिए यह सदमा है. पाठक उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव के दिनों में फंसी एक लड़ाई से आहत हैं. पाठक कितने कड़े हैं, इसका वाकया कभी पत्रकारों को सुशील कुमार मोदी ने ही सुनाया था. किस्सा यह कि पिछली सरकार में जब वे डिप्टी चीफ मिनिस्टर थे, तो पाठक अकेले ऐसे आईएएस थे, जो उनके द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में शामिल होने को नहीं आते थे. अब देखना होगा कि सरकार पाठक को मनाती है कि कोई नई तैनाती करती है.

के के पाठक, IAS

भोजपुर के डीएम बीरेंद्र प्रसाद यादव की शिकायत बहुत दिनों से बिहार सरकार के पास थी. भोजपुर में अरसा हो भी गया था. लेकिन लालू प्रसाद इन्हें हटने देने को तैयार कहां थे. वे तो बीरेंद्र प्रसाद यादव को पटना का डीएम बनाकर लाना चाहते थे. पर, नीतीश कुमार कभी तैयार नहीं हुए. सो, वे भोजपुर में ही बने रहे. इधर भोजपुर में जमीन का खेला बहुत हो गया. घेरे में डीएम भी थे. आरा की पूर्व सांसद मीना सिंह ने व्यवसायी कृष्ण कुमार सिंह की हत्या के बाद बाजाप्ता मोर्चा खोल दिया था. नीतीश कुमार से शिकायत की थी. अब नई सरकार में जब नीतीश कुमार सहज हुए, तो इन्हें न सिर्फ भोजपुर से विदा किया, बल्कि पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के विशेष सचिव के पद पर तैनात कर अभी किसी और जिले की बागडोर संभालने से रोक दिया.

बीरेंद्र प्रसाद यादव, IAS

सूबे की सियासत बदली तो छपरा को तो हिलना ही था. बालू का खेल छपरा में बहुत बड़ा है. पहले भी एसपी पर सीधा आरोप लगा है. तब आरोपी एसपी हटाये गए थे. बाद में, छपरा का मामला था, लालू की इच्छा को बिहार सरकार पूरी तरह इग्नोर नहीं कर पाई थी. लेकिन अब बालू माफिया और अपराधियों के खिलाफ लड़ने को यहां हरकिशोर राय को भेजा गया है. राय में दम है कि वे टूट पड़ सकते हैं. राय के बड़े भाई जमुई के डीएम हैं. यह तो सबको पता ही है कि छपरा लालू प्रसाद का पुराना लोकसभा क्षेत्र रहा है, जहां 2014 में राबड़ी देवी चुनाव लड़कर हारी थीं.

हरकिशोर राय, IPS

मोतिहारी के एसपी जितेन्द्र राणा के तबादले का बहुत बड़ा संदेशा है. राणा अकेले ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें इस तबादले में कोई पुलिसिया कार्य न सौंप कर समाज कल्याण विभाग में अपर सचिव बनाया गया है. कहा जाता है कि सरकार बिलकुल खुश नहीं थी. मोतिहारी में हाल के दिनों में AK-47 की बढ़ती चमक और लगातार बह रहे खून ने सरकार को परेशान कर रखा था. संभाले नहीं संभल रहा था मोतिहारी. अब बक्सर के एसपी उपेन्द्र कुमार शर्मा को मोतिहारी भेजा गया है. उपेन्द्र कुमार शर्मा को जानने वाले ‘नो नॉनसेंस’ वाले अधिकारी के रूप में पहचानते हैं. सरकार की प्रायोरिटी के हिसाब से शर्मा को मोतिहारी को शांत करना होगा.

उपेन्द्र कुमार शर्मा, IPS

भागलपुर के DIG विकास वैभव को काम का पुरस्कार मिला. अब उन्हें मुंगेर के DIG की अतिरिक्त जिम्मेवारी भी दी गई है. इस जिम्मेवारी का मतलब यह है कि सरकार ने मुंगेर प्रक्षेत्र के सभी जिलों का नट-बोल्ट एकसाथ कस दिया है. इन जिलों में बेगूसराय, खगड़िया, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई और लखीसराय शामिल है. राजनीतिक दृष्टिकोण से भी ये सभी जिले बड़े महत्वपूर्ण हैं. सरकार को इस प्रक्षेत्र के एक जिले में डीएम-एसपी के बीच चल रही तकरार की खबर भी है. मामला बालू का ही कहा जाता है. बेगूसराय में भी इधर के दिनों में अपराध बढ़ रहा था. नीतीश कुमार की सख्ती देखें, बिहार पुलिस के सबसे बड़े अधिकारी के संबंधी एसपी भी यहां से निपट गए.

विकास वैभव, IPS

सीनियर के बाद सरकार भी नालंदा के एसपी कुमार आशीष से शायद दुखी हो गई थी. इसलिए इन्हें भी हटना पड़ा. वैसे कुमार आशीष को जानने वाले बहुत सोशल और पब्लिक फ्रेंडली एसपी भी कहते थे. सोशल मीडिया के प्लेटफ़ॉर्म पर एक्टिव रह कर भी उन्होंने कई क्राइम डिटेक्ट किये. ऐसे डिटेक्शन समय की मांग हैं. खैर, अभी उन्हें सहरसा में BMP का कमांडेंट बनाकर भेजा गया है. पटना के सिटी एसपी (सेंट्रल) चन्दन कुशवाहा को बांका, सिटी एसपी (ईस्ट) धूरत शायली सबलाराम को अररिया और फुलवारीशरीफ के एएसपी राकेश कुमार को बक्सर का एसपी इसलिए बनाया गया, क्योंकि आईपीएस अधिकारी के तौर पर स्वतंत्र जिले की कमान सौंपे जाने का मामला बहुत दिनों से लंबित चला आ रहा था.

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