राम विलास पासवान ने किसानों का सिर काटने का ठेका ले रखा है : जदयू

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पटना (नियाज़ आलम) : मन्दसौर की घटना के बाद से भाजपा की केन्द्र सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है. इसी क्रम में जदयू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के बाद अब केन्द्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान पर निशाना साधा है.

पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि देश में कृषि क्षेत्र की बदहाली का मूल कारण देश की किसान विरोधी कृषि नीति है यह बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार बार कह रहे हैं. विदेशों में निवेश करके वहां के किसानों से दलहन की खेती करवाने की नीति की वजह से भारत के दलहन किसान पिछड़ गए.

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उन्होंने कहा कि जदयू को विदेश मंत्रालय से ऐसे दस्तावेज़ मिले हैं जिसके अनुसार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2016 को मोजांबिक दौरे पर कहा है कि ‘मोज़ाम्बिक से दालों की खरीद के लिए भारत की प्रतिबद्धता भारत की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करेगी. यह मोज़ाम्बिक में वाणिज्यिक खेती में दीर्घकालिक निवेश की सुविधा भी देगी, मोज़ाम्बिक में कृषि रोजगार पैदा करेगी और मोज़ाम्बिक में किसानों की आय बढ़ाएगी.’

नीरज कुमार ने कहा कि 8 जुलाई 2016 को खाद्य आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान ने टीवी साक्षात्कार में इस बात को स्वीकारा है कि भारत दलहन की खेती के लिए मोज़ाम्बिक और बर्मा जैसे देशों के किसानों को हर तरह की आर्थिक सहायता देगा ताकि इन देशों से भारत दलहन आयत कर सके. इससे पहले जून 2016 में खाद्य आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान के निर्देश पर खाद्य आपूर्ति सचिव हेम पाण्डे मोजांबिक दौरे पर गए.

नीरज कुमार ने कहा कि देश के किसानों के बीच मंत्रालय का कोई अधिकारी कभी नहीं गया और विदेशी किसानों के लिए सचिव स्तर के अधिकारी जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राम विलास पासवान ने देश के किसानों का सिर काटने का ठेका ले रखा है. जदयू प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्र ने तय कर लिया है कि 2021-22 तक किसान फड़फड़ाते रहें लेकिन उन्हें सही कीमत नहीं मिलेगी.

जदयू ने सवाल किया है कि यह कौन सा राष्ट्रवाद है जिसमें अपने देश के किसानों को हाशिये पर धकेल के विदेशों के किसानों के खुशहाली के लिए रणनीति तैयार की जा रही है और नीतियां बनायीं जा रही है? विदेशों में अन्न उपजाने और आयत पर निर्भरता को बढ़ावा देने से सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी, यह देश की आर्थिक और कूटनीतिक स्वायत्ता पर भी बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा रही है? क्या इस तरह के नीतिगत निर्णय को राष्ट्र विरोधी न समझा जाये? आरएसएस के लोग और भाजपा के नेता जवाब दें कि क्या यह कदम राष्ट्रहित में है? क्या इसे भारतीय किसान विरोधी न समझा जाए?

जदयू प्रवक्ता भारती मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने शायद कसम खा ली है कि वह देश की हर थाली में विदेशी दाल पहुंचाएंगे. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वह देश के किसानों को छोड़कर विदेशी किसानों को तकनीकी तौर पर मजबूत कर रहे हैं.

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