‘तेजस्वी की ‘दिल की बात’ नहीं, ये ‘दिलजले की बात’ है’

पटना : जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा है कि तेजस्वी यादव की ‘दिल की बात’ नहीं, ये ‘दिलजले की बात’ है. तेजस्वी यादव जितना वक्त अपने दिल की बात करने में लगा रहे हैं, यदि वो उतना वक्त सीबीआई द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब के लिए लगाते तो उन्हें थोड़ी राहत मिल जाती.

सिंह ने कहा कि वैसे तेजस्वी यादव नकल करने में माहिर हैं. इनकी दिल की बात नक़ल ही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का नकल कर रहे हैं.  लेकिन तेजस्वी यादव को यह समझना चाहिए कि मन की बात में प्रधानमंत्री विकास की बातों को करते हैं और देश की समस्याओं के समाधान की बात करते हैं. लेकिन तेजस्वी यादव की दिल की बात बिल्कुल दिलजले की बात लगती है. जो सिर्फ आलोचनाओं और द्वेष से भरी है.

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फाइल फोटो

संजय सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव उस वक्त की बात कर रहे हैं जब उनकी माँ और उनके पिता बिहार में मुख्यमंत्री हुआ करते थे. उस समय थानों की कीमत लगती थी और उस समय लालू प्रसाद के आवास पर अधिकारी बिना चढ़ावा चढ़ाये पोस्टिंग नहीं पाते थे.  यहां जंगलराज था. भ्रष्टाचार, अपराध, बलात्कार, बिहार की नियति बन चुकी थी. बिहार से तमाम डॉक्टर, इंजीनियर, उद्योगपति, शहरी पलायन कर चुके थे. लोग बिहार की ट्रेन में बैठना नहीं चाहते थे. बिहार और बिहारी  होना गाली हो चुका था. तेजस्वी यादव शायद भूल रहे हैं कि बिहार को जंगलराज से नीतीश कुमार ने ही मुक्त कराया था. लेकिन लालू प्रसाद और उनकी पार्टी अब तक नहीं सुधरी है. लालू सजायाफ्ता हो गए, लेकिन ना तो उन्होंने ना ही उनके पुत्रों ने इससे सबक लिया. नतीजा ये है कि अब सभी जेल जाने की तैयारी में हैं.

जदयू नेता ने कहा कि तेजस्वी यादव को तो अपना कुनबा देखना चाहिए जहां भ्रष्टाचारियों की पूरी फेहरिस्त है. अब तेजस्वी की आत्मा ठहरी बेचैन, वो किसी भी मामले पर उल्टा-सीधा बयान देकर अखबार में छपना चाहते हैं. तेजस्वी यादव एक ऐसे नेता हैं जो पूरी तरह से बेकारी के दौर से गुजर रहे हैं और अपने लिए काम की तलाश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ही बिहार के सुशासन के प्रतीक हैं और इसके लिए किसी से कोई प्रमाण लेने की जरुरत नही है. बिहार की जनता जानती है कि नीतीश कुमार का शासन कैसा रहा है. तेजस्वी यादव जी,  नीतीश कुमार के शासन प्रणाली के बदौलत विगत 12 वर्षो में बिहार सरकार ने जो नाम कमाया है, उसे बरकरार रखा है. कानून का पालन ठीक से किया जा रहा है. सरकार के तरफ से कार्रवाई और अनुसंधान में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नही किया जा रहा है. पिछले 12 वर्षों में सरकार ने कार्य संस्कृति का विकास किया है.

बिहार के लोग नीतीश कुमार को संकल्प पुरुष के रूप में देखते हैं और नतीजतन आज विकास हो रहा है. नीतीश कुमार सामाजिक न्याय के पुरोधा हैं. न्याय के साथ विकास की अवधारणा को चरितार्थ कर उन्होंने समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त किया है. बिहार की जनता जानती है कि नीतीश कुमार का गवर्नेंस कैसा रहा है. राजद को पता होना चाहिए कि नीतीश कुमार अपनी राजनीति अपने शर्तों पर करते हैं और बिहार की जनता भी ये जानती है.

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