‘छेड़खानी के 342 मामले, जबकि दहेज हत्या के 987 मामले आये हैं’

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फाइल फोटो

पटना : जदयू प्रवक्ता व विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा है कि अब बिहार को दहेज मुक्त बनाने की शुरुआत हो गई है. इसके साथ ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर भी रोक लगाने का काम शुरु किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता, सुख भोगने के लिए नही बल्कि, समाज में परिवर्तनके लिए ली है.

संजय सिंह ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि बिहार कमजोर वर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016-17 में 987 बेटियां दहेज के नाम पर मार दी गई. साल 2015 में 1154 बेटियों की जान दहेज की वजह से चली गई. महिला हेल्प लाइन में हर साल दहेज प्रताड़ना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. 2015 में जहां 93 मामले दर्ज हुए थे, वह 2016 में बढ़कर 111 हो गए थे.

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उन्होंने कहा कि साल 2016 में राज्य के अलग-अलग थानों में दहेज उत्पीड़न के कुल 4852 मामले दर्ज किए गए थे. राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि हरेक घंटे दहेज के नाम पर एक लड़की को मार दिया जाता है. हालांकि दहेज प्रताड़ना में कानून किसी को बख्श नहीं रहा है, इसके बाद भी ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है. ऐसे मे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार ने संकल्प उठाया है कि बिहार को दहेज मुक्त बनाना है. पार्टी दहेज मुक्ति के लिए राज्यव्यापी आंदोलन चलायेगी.

सिंह ने कहा कि दहेज किस कदर परिवार को बर्बाद कर रहा है और बेटियों की जान ले रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2016 में राज्य में जहां छेड़खानी के 342 मामले थानों में दर्ज हुए, वहीं दहेज की लालच में 987 बेटियों की जान ले ली गई. सामाजिक जागरूकता के जरिए दहेज को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसमें अगर समाज के लोग गंभीरता से साथ दें तो शराबबंदी की तरह दहेजबंदी को भी कामयाबी मिलनी तय है.

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