All Is Not Well : तभी तो श्याम रजक बिहार की सड़कों पर उतरने को तैयार हैं

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जदयू विधायक श्याम रजक (फाइल फोटो)

पटना : नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में सबकुछ All Is Well जैसा नहीं दिख रहा है. खासकर दलित नेताओं में. अपनी उपेक्षा से बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी पहले से खीझे चल रहे थे. अब पूर्व मंत्री श्याम रजक का सुर भी साथ मिल गया है. दोनों सड़क पर उतरने की बात कर रहे हैं. मुद्दा दलितों का है. आरोप अधिकारों को छीनने की साजिश है.

उदय नारायण चौधरी और श्याम रजक का सुर आज 30 अक्टूबर को जब एक जैसा मिला, तो बिहार में चर्चा शुरू हो गई कि किसके खिलाफ सड़क पर उतरेंगे. कौन छीन रहा है दलितों का अधिकार? केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार है, तो बिहार में जदयू की नीतीश कुमार की सरकार. ऐसे में, डर किससे पैदा हो गया है? पोलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं कि उदय नारायण चौधरी बिहार विधानसभा का चुनाव हारने के बाद भी कुछ बड़ा मिलने की आस लगाए थे, जो नहीं मिला. श्याम रजक मंत्री नहीं बने. अब कांग्रेस वाले अशोक चौधरी को अधिक भाव मिल रहा है, तो गुस्सा और बढ़ गया है.

श्याम रजक ने पटना में पत्रकारों से कहा है कि वंचित समाज को मुख्यधारा में लाने का भीमराव आंबेडकर और महात्मा गाँधी ने जो सपना देखा था, वह देश की आजादी के सात दशक बाद भी पूरा नहीं हो पाया है. हालत ये है कि वंचित समाज आज भी कूड़े के ढेर से अनाज चुनकर पेट की भूख मिटाने को विवश है.

जदयू नेता कहते हैं कि वे नीतीश कुमार सरकार की मंशा पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह सच है कि वंचितों की भलाई के लिए जिनको पालिसी को लागू करना था, उनकी नीयत में खोट है. सत्ता में जो लोग हैं, उनकी जिम्मेदारी थी, हमारे समाज को मुख्यधारा में लाने की. पर कुछ लोग हमारे अधिकार को ही छीनना चाहते हैं और आरक्षण ख़त्म करने की बात कह रहे हैं. इसलिए हम लड़ेंगे और जिला से ब्लॉक स्तर तक जाकर इस बारे में लोगों को बताने का काम करेंगे.