किसान बेहाल हैं और कृषि मंत्री मोतिहारी में बाबा रामदेव के साथ योग कर रहे हैं : जदयू

पटना (नियाज़ आलम) : मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसान विरोधी कार्रवाई को लेकर जदयू ने केन्द्र सरकार और कृषिमंत्री को आड़े हाथों लिया है. पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने मध्य प्रदेश को व्यापमं प्रदेश बताते हुए कहा कि मंदसौर में दलहन खाद्यानों के न्यूनतम मूल्य में बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ हुई दर्दनाक घटना से पूरा देश मर्माहत हुआ है. यहां भाजपा सरकार के इशारे पर पांच किसानों को मार दिया गया, जो अफसोसनाक है.

पार्टी प्रवक्ता ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह पर हमला करते हुए कहा कि देश के किसान बेहाल हैं और कृषि मंत्री मोतिहारी में बाबा रामदेव के साथ योग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नाम सुदर्शन और दर्शन छोटा. नाम राधामोहन है और कृषि मंत्री को नाम के अनुरूप काम करना चाहिए. उन्हें किसानों को मोहना चाहिए लेकिन वह बाबा रामदेव को मोह रहे हैं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग का राजनीतिकरण किया जा रहा है.

मंदसौर के मूल में केंद्र की किसान विरोधी नीति

साथ ही उन्होंने केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि मंदसौर के किसान मुख्य रूप से दो मांगे कर रहे थे. एक तो उपज का सही दाम मिले और दूसरा कर्ज माफ हो. उन्होंने कहा कि दोनों ही दिशा में सरकार कोई सहयोग नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर मंदसौर की घटना के मूल में जायें तो सरकार की किसान विरोधी नीति है. कृषि संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी उन मंत्रियों एवं अधिकारियों को दी गई है, जिन्हें कृषि से कोई लेना-देना नहीं है.

नीरज कुमार ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का राष्ट्रवाद देश के किसानों के लिए नहीं बल्कि मोजांबिक जैसे अफ्रीकी देश के किसानों के लिए है. यहां जमीन लीज़ पर लेकर किसानों से पैदावार कराया जबकि अपने देश के किसानों को वादे के मुताबिक न्यूनतम मूल्य भी नहीं दिया. 39 अरब डॉलर की दाल का आयात किया गया, यह कैसा राष्ट्रवाद है. क्या यह किसान हित में है?

नीति आयोग पर भी निशाना

नीरज कुमार ने कहा कि नीति आयोग के सदस्य रमेश चन्द्र ने कहा है कि कर्ज माफी से किसानों की आदते बिगड़ेंगी और वह मुफ्तखोर हो जाएंगे. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि जब सरकार अंबानी और अड़ानी उद्योगपतियों का हज़ारों करोड़ रूपये का कर्ज माफ कर सकती है तो फिर गरीब किसानों का क्यों नहीं.

भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक आत्महत्या

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पार्टी प्रवक्ता अरविन्द निषाद ने कहा कि आज सबसे ज्यादा किसान भाजपा शासित राज्यों में आत्महत्याएं कर रहे हैं. इनमें महाराष्ट्र सबसे आगे है. आत्महत्या करने वाले किसान या तो दलित हैं या पिछड़े वर्ग के हैं. राज्य और केन्द्र सरकार इनका आंकड़ा तक उपलब्ध नहीं करा रही है. साल 2015 में महाराष्ट्र में 4291 किसानों ने आत्महत्या की. इसी तरह कर्नाटक में 1569, तेलंगाना में 1400, मध्य प्रदेश में 1290, छत्तीसगढ़ में 954, आंध्रप्रदेश में 916 और तमिलनाडु में 606 मामले सामने आए हैं.

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