बोले संजय सिंह, सुमो बिहार में किसानों को भड़का रहे हैं

संजय सिंह जदयू (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : जदयू प्रवक्ता  संजय सिंह ने किसानों को आर्थिक मदद के मुद्दे पर सुशील कुमार मोदी को घेरा है. उन्होंने सुमो पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सुशील मोदी बिहार के वित मंत्री सिर्फ नाम के रहे थे. उनको ये समझ नही आ रहा कि केंद्र के बैंक बिहार के किसानों को बहुत कम पैसे कर्ज के रुप में देते है . वैसे भी जो हालात सुशील मोदी बिहार के बारे में बता रहे वैसा नही है . किसानों को यहां बैंक से बहुत कम रकम कर्ज के रुप में मिलती है . बिहार के पैसे से दूसरे राज्य विकसित हो रहे हैं. वजह है कि यहां के बैंकों में जितने रुपये जमा किये जाते हैं, लेकिन इन रुपयों से आम लोगों की ऋण के रूप में आर्थिक सहायता या जन कल्याणकारी योजनाओं में बैक खर्च नहीं कर रहे है.  

संजय सिंह ने कहा कि जब बीजेपी शासित राज्यों में किसान आंदोलन कर रहे है और आत्महत्या कर रहे है तो सुशील मोदी यहां के किसानों को भी भड़का रहे हैं . वैसे भी सुशील मोदी के जीन में दंगा फसाद करवाना है. इनके केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह हवाई जहाज से आते है और सीधे मोतिहारी में लैंड करते है . लगता है कि बिहार में और कोई दूसरा जिला है ही नही . उन्होने कभी राष्ट्रीय बैंकों को निर्देश नही दिया कि बिहार के किसानों और यहां के आम लोगो का आसानी से लोन दें .  

उन्होंने आगे कहा कि सुशील मोदी जी , पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान सीडी रेशियो 44.99 प्रतिशत था . जबकि, सीडी रेशियो का राष्ट्रीय औसत 78 प्रतिशत है . राज्य का औसत करीब इससे आधा है . बिहार के बैंकों में जमा हुए रुपये यहां तो खर्च नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन दूसरे राज्यों खासकर विकसित राज्यों में बड़े स्तर पर खर्च हो रहा है. इसी का नतीजा है कि विकसित राज्यों मसलन महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा समेत अन्य राज्यों के बैंकों का सीडी रेशियो 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है .

महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में तो यह 150 प्रतिशत से भी ज्यादा है. इन राज्यों में जमा होने से ज्यादा रुपये के लोन बांटे जा रहे हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार जैसे गरीब राज्यों में जो लोग पैसे जमा करते हैं, उनका उपयोग बैंक वाले विकसित राज्यों में कर रहे हैं. तभी सीडी रेशियो में दो गुना से ज्यादा का अंतर है. राज्य में मौजूद बैंक ऋण देने में सबसे ज्यादा कोताही बरतते हैं, जिसकी वजह से रुपये बैंकों में पड़े रहते हैं.

बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य के सभी बैंकों में 2 लाख 80 हजार 370 करोड़ रुपये जमा हुए, जिसमें महज एक लाख 23 हजार 191 करोड़ रुपये के ही ऋण बांटे गये . बचे हुए पैसों को बैंक दूसरे राज्यों में वितरित करते हैं. यहां बैंकिंग कारोबार में पिछले 12 साल में 65-70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. फिर भी सीडी रेशियो नहीं सुधर रहा है .

ग्रामीण इलाकों में भी लोग बैंकों के प्रति काफी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं . सुशील मोदी बताएं कि इन बैंको पर केंद्र सरकार का अधिकार है कि नही . शहरों में तो कुछेक लोगो को बैंक लोन दे देते है लेकिन गांव के किसानों के सामने बैंक इतनी समस्या खडी कर देता है कि किसान बेचारे मायूस हो जाते है .

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