भ्रष्‍टाचार की गंगा में डूबे हैं सभी, सिर्फ़ सत्ता संघर्ष की होड़ : सतीश कुमार

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पटना : जनतांत्रिक लोकहित पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व पूर्व विधायक सतीश कुमार ने मंगलवार को पड़े राजनेताओं पर इनकम टैक्‍स व सीबीआई के छापे और शीर्ष न्‍यायालयों में आपसी टकराव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भ्रष्‍टाचार की गंगा में सभी दल डूबे हैं. सिर्फ और सिर्फ सत्ता संघर्ष के लिए ये दल एक – दूसरे का चेहरा मैला करने और अपना चेहरा चमकाने की होड़ में लगे हुए हैं.

पटना कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान कुमार ने कहा कि राजद प्रमुख लालू यादव और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के यहां इनकम टैक्‍स व सीबीआई की छापेमारी एक बात है, मगर इन छापों पर श्रेय लेकर भाजपा नेता सुशील मोदी क्‍या साबित करना चाहते हैं? क्‍या उनका दामन साफ है? भाजपा ने भ्रष्‍टाचार नहीं किया है क्‍या ?  भाजपा के शासन काल में क्‍या महंगाई कम गई या किसानों का भला हुआ?

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उन्‍होंने कहा कि सच्‍चाई यह है कि खुद को जेपी आंदोलन की उपज बताने वाले बिहार के चारों नेता लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी और रामविलास पासवान एक ही थाली के चट्टे – बट्टे हैं. इन चारों को बिहार के किसानों, कामगारों, युवाओं की खुशहाली से कोई लेना – देना नहीं है. इनमें राजनीतिक प्रतिद्वंदिता बस इतनी भर है कि राज्‍य की राजनीतिक गतिविधियां इनके इर्द – गिर्द चलती रहे.

उन्‍होंने कहा कि ये चारों व्‍यक्तिवादी, अधिनायकवादी और जाति – धर्म की राजनीति के पर्यायवाची है. विकल्‍प की तलाश कर रही बिहारी आवाम को पुन: जाति – धर्म के भावनात्‍मक बहाव में अपने इर्द – गिर्द ले जाने के लिए राजनीतिक ड्रामा हो रहा है.

सतीश कुमार ने कहा कि इस देश का ज्वलंत सवाल राजनेताओं का भ्रष्‍टाचार है. इससे कोई अछूता नहीं है. लेकिन अब सवाल है कि 20 हजार से एक लाख रूपए अगर किसानों का कर्ज बकाया हो तो उनकी तीन गुनी महंगी जमीन बैंक नीलामी पर चढ़ा देती है.

उन्‍होंने सत्ता के छत्रछाया में पनप रहे उद्योगपति पर करोड़ों – अरबों का एनपीए रहने के बावजूद फिर से उन्‍हें कर्ज दे रही है. भाजपा के स्‍वच्‍छ छवि के नेता इन मामलों में चुप्‍पी क्‍यों साधे हैं?

कुमार ने कहा कि केंद्र में बिहार से कई मंत्री हैं. राज्‍य में सुशासन बाबू की सरकार है. फिर भी बिहार के किसान पलायन एवं बंधुआ मजदूरी को विवश हैं. राज्‍य में माध्‍यमिक शिक्षा में नामांकन 42 फीसदी है. उच्‍च शिक्षा में नामांकन 38 फीसदी है. राज्‍य का कृषि विकास दर शून्‍य से नीचे चला गया है.

इसके लिए कौन दोषी है ? उन्‍होंने कहा कि जलोपा की सपष्‍ट मान्‍यता है कि अगर आज बिहार के युवा बल, कर्मठता एवं लगनशीलता वाले श्रमिक विकास के निचले पायदान पर खड़े हैं तो यह जेपी के चारों मानस पुत्रों की चेहरा चमकाने की छिछोरी राजनीति और सत्‍ता लोलुपता की वजह से.

सीमा पर आतंकवाद, जवानों की शहादत, मंहगाई और भ्रष्‍टाचार पर भाजपा को घेरते हुए जलोपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने कहा कि जनता भाजपा के रवैये को खूब समझ रही है. इनके शासन काल में देश के शीर्ष न्‍यायालयों में टक‍राहट की स्थिति है. यह टकराहट जाति – धर्म की राजनीति को बढ़ावा दे रही है.

पीएम नरेंद्र मोदी और संघ के लोग मस्‍ती का नगाड़ा बजा रहे हैं. देश के युवा लव जेहाद, घर वापसी, गौमाता, गंगा मैया, नर्मदा माता की चक्‍की में पिसे जा रहे हैं. आज देश में हो रहे बलात्‍कार, दलित व आदिवासियों के गैंगरेप, किसानों की खुदकुशी पर बोलने वाला कोई नहीं है. इन मुद्दों पर बहस – मुहावशा नहीं होता.

उन्‍होंने कहा कि जलोपा की स्‍पष्‍ट मान्‍यता है सत्ता पक्ष एक बार फिर से देश की जनता को गरीबी, अशिक्षा और कबीलाई संस्‍कृति में धकेल देना चाहती है. देश फिर से शोषण, दमन की समाज और गृह युद्ध के दिशा में बढ़ता जा रहा है.

विकास के असल मुद्दे गायब हो रहे हैं. ऐसे में जलोपा अपनी महत्ती जिम्‍मेवारी को समझते हुए एक नए सोच एवं नई उमंग के साथ विकल्‍प की राजनीति कर रही है और जेपी के मानस पुत्रों की राजनीतिक दुकानदारी का सच जनता के सामने लागी. संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान पार्टी के नेता संजय मंडल भी उपस्थित रहे.

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