बालू माफिया, सावधान ! बुखार छुड़ाने को आ गए हैं के के पाठक

KK-PATHAK
खान विभाग के प्रधान सचिव के के पाठक

पटना : बिहार की नई सरकार के सीधे निशाने पर सूबे भर का बालू माफिया है. बहुत बड़ा सिंडिकेट है ये. अरबों का काला धंधा है. गठजोड़ दूर तक है. जानकार कहते हैं कि सिंडिकेट के अधिकांश माफिया पुराने वाले महागठबंधन के बड़े वाले पावर हाउस से सीधे जुड़े थे. इस माफिया की ताकत इतनी थी कि सफाई कर देने वाले अधिकारियों को जिलों में तैनात नहीं होने दिया जाता था. लेकिन अब नीतीश कुमार ने आज सोमवार 31 जुलाई को किये गए IAS अधिकारियों के तबादले में बिहार के सबसे सख्त माने जानेवाले पदाधिकारी के के पाठक को खान एवं भूतत्व विभाग का प्रधान सचिव बना दिया है.

के के पाठक की अधिसूचना जारी होते ही बालू माफिया के सिंडिकेट में कंपकंपी छूटने लगी है. सबों को पता है कि पाठक इस मिजाज के IAS अधिकारी हैं कि जब वे सफाई ऑपरेशन शुरू करते हैं, तो किसी का नहीं सुनते. बिहार में 2016 में जब शराबबंदी लागू किया गया तो उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का प्रधान सचिव पाठक को ही बनाया गया था. तब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में भारत सरकार के गृह मंत्रालय से होम कैडर में लौटे थे.

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पाठक ने शराबबंदी का बिहार में बेहद सख्त नियम तैयार कराया. लेकिन मिजाज से इतने कड़े हैं कि नालंदा जिले में हुई एक कार्रवाई को लेकर जब पंगा फंसा, तो वे डिगे नहीं, विरोध किया और छुट्टी पर चले गए. बाद में उन्हें सरकार ने राजस्व पर्षद में अपर सचिव बना दिया. तब से वे बिहार के प्रशासन की मुख्यधारा में नहीं थे. लेकिन अब सरकार के सबसे बड़े ऑपरेशन को कामयाब करने की जिम्मेवारी दी गई है.

के के पाठक तुरंत ऑपरेशन शुरू करने वाले अधिकारी हैं. तय मानिए कि जब पाठक शुरू होंगे तो बालू माफिया के सभी चेहरे नंगे होंगे. परतें खुलेंगीं, तो न सिर्फ खान व भूतत्व विभाग के अधिकारी, बल्कि इस माफिया सिंडिकेट से कमीशन खाकर मालामाल होने वाले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी कैश की जगह पानी पीने लगेंगे.

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