सभी आंसरशीट वेबसाइट पर तुरंत करें अपलोड, 5 जून को बंदी का ऐलान

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फाइल फोटो

पटना : जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय संरक्षक व सांसद पप्‍पू यादव ने कहा है कि बिहार बोर्ड के नतीजों ने लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है. बेवजह फेल किये गए छात्र आत्महत्या के फैसले की ओर बढ़ रहे हैं. इसके लिए बिहार सरकार जिम्मेवार है. पूरे मामले की जांच पटना हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए.

श्री यादव ने कहा कि सरकार छात्रों के बीच मचे कोहराम को रोकने के लिए तुरंत सभी पास-फेल छात्रों के आंसर-शीट को वेबसाइट पर अपलोड करे. ऐसा करने से बहुत साड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा. छात्र जान जायेंगे कि उन्होंने क्या लिखा था और टीचर ने क्या जांचा. पार्टी की ओर से उन्होंने 5 जून को बिहार के सारे कॉलेज/यूनिवर्सिटी बंद कराने का ऐलान किया है. 6 जून को जिला मुख्यालयों पर धरना व तालाबंदी का आन्दोलन होगा. 7 जून को पटना में एग्जामिनेशन बोर्ड के सामने प्रदर्शन करेंगे.

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उन्होंने कहा कि पूरी अराजक व्यवस्था के कारण लाखों छात्रों के साथ खिलवाड़ हुआ है. यह कैसे संभव है कि 3027 कॉलेजों में से 645 कॉलेजों में एक भी छात्र परीक्षा पास नहीं किया. अलग-अलग तरीके का मार्कशीट देकर कंफ्यूजन पैदा किया जा रहा है.

पूरी गलती इंटर छात्रों की कॉपी मिडिल और प्राइमरी स्कूल के टीचरों से जांच कराने के कारण हुई है. यह कतई संभव नहीं है कि छात्र IIT का मेंस कम्पलीट कर लें और उसे बिहार बोर्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री में शून्य और एक नंबर आये. उन्होंने यह भी मांग की कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिला मुख्यालयों पर कैंप कार्यालय खुले.

नैंसी झा मामले की SIT जांच करे

सासंद ने मधुबनी के नैंसी झा कांड को दामिनी से भी वीभत्‍स बताया. उन्‍होंने कहा कि हम 15 दिनों के अंदर इसकी एसआईटी जांच की मांग करते हैं और नैंसी झा के परिजन भी यही चाहते हैं. सिविल सर्जन की रिपोर्ट के अनुसार, 72 घंटे बाद उसकी लाश का पोस्टमार्टम किया गया, जबकि लाश 62 घंटे पहले बरामद हुई थी. वह काफी होनहार बच्‍ची थी. मगर नफरत के कारण अपहरण कर बलात्‍कार के बाद निर्मम हत्‍या कर दी गई.

उन्होंने कहा कि यह घटना इंटरनेशनल न्‍यूज नहीं बने, इसलिए प्रशासन ने इस घटना को दबाने के प्रयास किया. आनन – फानन में कह दिया, बच्‍ची की बलात्‍कार नहीं हुआ और एसिड से भी नहीं जलाया गया. वहीं अब प्रशासन नैंसी झा के परिजनों पर भी दवाब बना रही है.

इसके आड़ में पुलिस अपनी नाकामी छुपाना चाहती है. अगर पुलिस ने समय रहते उनके परिजनों की बात मान कर कार्रवाई की होती तो उस होनहार बच्‍ची के साथ ऐसा नहीं होता.

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