भाजपा को मिल रही गाली से खुश हैं बिहार के एलायंस पार्टनर भी

पटना : देश का माहौल पहले जैसा नहीं है. बहुत कुछ बदलता दिख रहा है. देश की इकॉनमी डूब रही है, एक्सपर्ट कह रहे हैं. नौकरियां ख़त्म होती जा रही है. महंगाई और जीएसटी की मार पब्लिक को परेशान किये है. ऐसे में, देश में नरेन्द्र मोदी के जयकारे पहले से कम होते दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर जवाब देने में भक्तों को भी परेशानी हो रही है. प्रत्येक सवाल के जवाब को हिन्दू-मुस्लिम में बांट कर रख दिया जा रहा है.

नरेन्द्र मोदी के पुराने वायदे और भाषण ही उनके लिए अब सबसे बड़ी मुसीबत बने हुए हैं. लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि नरेन्द्र मोदी की खिंचाई से बिहार में एनडीए के अलायन्स पार्टनर बहुत ही खुश हैं. रामविलास पासवान की लोजपा, उपेन्‍द्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतन राम मांझी की पार्टी हम पहले से अलायन्स पार्टनर हैं, जदयू अभी फिर से बना है. आप किसी भी अलायन्स पार्टनर के बड़े नेता से बात कर लें, अनौपचारिक बातचीत शुरू होते ही वे बहुत खुश दिखने लगेंगे. कहेंगे कि जो हो रहा है, वह ठीक ही हो रहा है, भाजपा का दिमाग बहुत ज्यादा चढ़ गया था.

एक निजी बातचीत में अलायन्स पार्टी के एक केन्द्रीय मंत्री कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी से सवाल पूछे जाने नहीं शुरू होते तो भाजपा 2019 के लोक सभा चुनाव में हम एलायंस पार्टियों को कोई भाव नहीं देती. अभी से नखरा कितना अधिक शुरु हो गया था. ऐसा महसूस करने लगे थे कि अकेले देश को जीत लेंगे, हम सभी कुछ हैं ही नहीं. पर आज भाजपा की हालत यह होने लगी है कि ट्विटर पर कई दिनों तक ‘विकास पगला गया है’ जैसा हैशटैग गुजरात से शुरु होकर पूरे देश में ट्रेंड करने लगता है.

भाजपा के गम से इसलिए खुश हैं एलायंस पार्टनर

पोलिटिकल पंडित कहते हैं कि जदयू की स्थिति अभी सबों ने देखी है. नीतीश कुमार से सौदा कर भाजपा ने बिहार में अपने सभी नेताओं को पुराने फार्मूले के तहत मंत्री बनवा दिए, लेकिन जब केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्‍तार में जदयू को जगह देने की बारी आई, तो बातचीत तक नहीं की गई. जदयू वाले मन मसोस कर ही रह गये. अब कहा जा रहा है कि पुराने फार्मूले के तहत लोक सभा को जदयू की सीटें चुनाव लड़ने को नहीं मिल सकती. हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी भी उदास हैं, क्‍योंकि उन्‍हें बिहार की एनडीए सरकार में कुछ भी नहीं मिला. राज्‍यपाल बनने का सपना भी धरे का धरा रह गया. बेटे का एडजस्‍टमेंट भी संभव नहीं हो पा रहा है.

रामविलास पासवान भी जानते हैं कि भाजपा ने अभी से 2019 के लोक सभा चुनाव में लोजपा को 2014 की तरह लड़ने को 7 सीटें नहीं देने का मन बना रखा है. नालंदा सीट की दावेदारी तो जदयू के एनडीए गठबंधन में आते ही खत्‍म हो गई. मुंगेर, खगडि़या और वैशाली पर भी नजर लगी है. रालोसपा वाले उपेन्‍द्र कुशवाहा का हाल भी कुछ ठीक नहीं है. केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल के वक्‍त भी उनके नाम को लेकर कई खबरें तेजी से चली थी.

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