राज्य सरकार जवाब दे – 550 करोड़ खर्च करने के बावजूद लाभ क्यों नहीं?

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पटना (एहतेशाम अहमद) : पटना हाई कोर्ट ने सूबे में जैविक खेती को बढावा देने की सरकार की योजना में उल्लेखनीय प्रगति नहीं होने पर जवाब माँगा है. बिहार राज्य किसान सभा की ओर से दायर लोकहित याचिका में बताया गया है कि सरकार द्वारा करीब 5.5 बिलियन (550 करोड़ रुपये) खर्च कर दिये जाने के बावजूद इस मामले में कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है. उनका कहना था कि सूबे में जैविक खेती को बढावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि मैप बनाया गया था. जैविक खेती हेतु योजनाएं बनायी गयी जिस पर करीब पांच बिलियन से अधिक राशि खर्च हो गयी परंतु कोई लाभ किसानों को नहीं मिल पाया है.

इस मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है.

फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में जमानत

एक अन्य मामले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने के आरोप में जेल में बंद गया की की पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष करूणा कुमारी को आज सोमवार को पटना हाई कोर्ट ने बड़ी राहत प्रदान करते हुए नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है. न्यायाधीश संजय प्रिया की एकलपीठ ने करूणा कुमारी की ओर से दायर नियमित जमानत यचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

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गौरतलब है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लडने के आरोप में लगातार पुलिस की दबिश झेल रहीं गया जिला परिषद की अध्यक्ष करूणा कुमारी ने शेरघाटी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. करूणा कुमारी पर यह आरोप लगाया गया था कि वह मुख्य रूप से कुशवाहा जाति की है. यह बिहार में पिछड़ी जाति है. पर करूणा ने अति पिछड़ी जाति-दांगी का प्रमाण पत्र बनवा लिया है. साथ ही साथ उनपर यह भी आरोप लगा था कि वह दो वर्ष पूर्व हुए पंचायती राज चुनावों में इसी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ उठाकर चुनाव में उतरी और जीत गई.

फर्जीवाड़े का मामला उजागर होने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया था. जिसके बाद अपनी चार माह की बेटी अनिष्का को गोद में लेकर अदालत में हाजिर हुई करूणा कुमारी को मजिस्ट्रेट गोरखनाथ दुबे ने न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेजने का आदेश दिया था. तब से वह जेल में बंद हैं.

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करूणा कुमारी ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर नियमित जमानत की मांग की थी. जिसपर सोमवार को सुनवाई की गयी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि यह मामला दांगी जाति के फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़ा हुआ है. इस प्रमाण पत्र को गया के कलक्टर द्वारा रद्द कर दिया गया था. जिसके बाद जाति प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच हेतु इसे कास्ट स्क्रूटनी कमिटी में भेज दिया गया है. जहां यह मामला लंबित पड़ा हुआ है.

अदालत को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता अपनी चार माह की बच्ची के साथ जेल में बंद हैं. जो न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है. अदालत को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता के माता-पिता, भाई सभी दांगी जाति के ही हैं. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को नियमित जमानत पर रिहा करने का निर्देश दे दिया.

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