हाई कोर्ट का निर्देश : तीन माह में पूरी करें आयुष चिकित्सकों की बहाली प्रक्रिया

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पटना (एहतेशाम) : करीब डेढ दशक से आयुष चिकित्सकों की बहाली बंद होने के मामले को पटना उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए तीन माह में बहाली प्रक्रिया पूरी करने और कार्रवाई रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने गजानन अरुण की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे में करीब डेढ दशक से आयुष चिकित्सकों की बहाली नहीं की गयी है. वहीं बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से बताया गया कि विभाग से अभी तक रिक्तियां ही नहीं भेजी गयी है जिससे बहाली प्रक्रिया शुरू की जा सके. राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन चिकित्सकों की बहाली हेतू कार्रवाई की जा रही है. इसके लिए संबंधित नियम में संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.

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गौरतलब है कि बिहार में 15 वर्षों से आयुष डॉक्टरों की बहाली नहीं हुई है. वर्ष 2000 में 33 आयुर्वेद डॉक्टरों की बहाली हुई थी. उसके बाद से बहाली बंद है. बिहार में आयुष मिशन का गठन किया गया, लेकिन बहाली नहीं की गयी. जिला अस्पताल, रेफरल अस्पताल व अनुमंडल अस्पतालों में 402 डॉक्टरों के पद हैं. इनमें सिर्फ बक्सर जिला अस्पताल में एक आयुष  डॉक्टर है. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व राजकीय औषधालय में आयुष डॉक्टरों के कुल 412 पद हैं, जिनमें 324 कार्यरत हैं. 88 पद रिक्त हैं. अनुमंडल अस्पताल, जिला सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आयुष डॉक्टरों की नियमित बहाली लंबित है.

इधर स्वास्थ्य विभाग बार-बार आयुष डॉक्टर्स की बहाली का आश्वासन दे रहा है, लेकिन अभी तक बिहार लोक सेवा आयोग को रिक्तियां ही नहीं भेजी गई है. आयुष डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य डॉक्टरों,  इमरजेंसी कैडर के डॉक्टरों की बहाली की प्रक्रिया जारी है, लेकिन आयुष डॉक्टरों की भर्ती के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है.

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राज्य में अधिकतर आयुष डॉक्टर संविदा पर कार्यरत हैं. इनका मानदेय भी काफी कम है. संविदा सामान्य डॉक्टरों का मानदेय 44 हजार प्रतिमाह है, वहीं आयुष डॉक्टरों को 20 से 22 हजार मिलते हैं. यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर कार्यरत दंत डॉक्टरों का मानदेय भी बढ़ाया है, लेकिन आयुष डॉक्टरों को छोड़ दिया गया. आयुष मिशन में आयुर्वेद, होम्योपैथ व यूनानी के अलग-अलग निदेशक बहाल होने हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में भी कार्रवाई शुरू नहीं की गयी है. वर्ष 2017 के बजट सत्र में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि सूबे में आयुष चिकित्सकों के 874 पद स्वीकृत हैं जिनमें 556 पद रिक्त हैं.

इनमें 318 पदों पर बहाली की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जायेगी.