स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सहित 3 को पटना हाईकोर्ट का नोटिस, 4 हफ्ते में दें जवाब…

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फाइल फोटो

पटना (एहतेशाम) : सरकारी दवा बाजार में बेचने व दवाओं के उचित रखरखाव नहीं होने पर पटना उच्च न्यायालय ने नाराजगी जताई है. सरकारी अस्पतालों में दवाओं का रखरखाव सही नहीं रहने, मरीजों को एक्सपायरी दवा देने और आवश्यकता से अधिक मात्रा में दवा खरीदने पर नाराज उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, ड्रग कंट्रोलर एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशक से जवाब तलब किया है. सभी को 4 सप्ताह के अंदर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया गया है.



मामले में मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह की खण्डपीठ ने विकास चन्द्र उर्फ गुड्डू बाबा की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. मामले में याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि सूबे के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को दी जाने वाली चिकित्सकीय सुविधा का हाल काफी बुरा है. अदालत को बताया गया कि इन सरकारी अस्पतालों में दवाओं के रखरखाव की स्थिति काफी दयनीय है. जिसका प्रतिकूल प्रभाव दवाओं पर पड़ता है.

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याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को यह भी बताया गया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाओं के नाम पर उन्हें एक्सपायरी दवाओं की आपूर्ति की जा रही है. इससे कई बार तो मरीजों की जान पर भी बन आती है. इतना ही नहीं,  मरीजों को मुफ्त आपूर्ति के लिए आनेवाली दवाओं को खुले बाजार में बेच दिया जाता है. मरीजों से अस्पतालों में दवाएं नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है.

इस मामले में अस्पतालों पर एक और गंभीर आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि अस्पतालों में जिन दवाओं की आवश्यकता काफी कम मात्रा में होती है,अस्पताल प्रशासन द्वारा उन दवाओं की खरीददारी आवश्यकता से काफी अधिक कर सरकारी राजस्व को हानि पहुंचायी जा रही है.

अतिक्रमित भूमि के मामले को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश

सूबे के सभी मेडिकल काॅलेजों एवं अस्पतालों में अतिक्रमण मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराज पटना उच्च न्यायालय ने महानिबंधक को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालतों में चल रहे ऐसे मामलों को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. साथ ही साथ मामले पर तुलनात्मक रिपोर्ट भी तैयार करने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह की खण्डपीठ ने
विकासचन्द्र उर्फ गुड्डू बाबा की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

गौरतलब है कि पूर्व की सुनवाई में अदालत ने सभी जिला न्यायाधीशों को यह निर्देश दिया था कि वे निचली अदालतों में मेडिकल काॅलेज की अतिक्रमित भूमि से सम्बंधित मामलों का निपटारा चार सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था. बावजूद इसके अभी तक ऐसे मामलों का निपटारा नहीं किया जा सका है.