सारण के 23 बच्चों की मौत के आरोपी प्रिंसिपल की याचिका पर हाई कोर्ट करेगा सुनवाई

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पटना (एहतेशाम) : पटना हाई कोर्ट की एक खंडपीठ साल 2013 में सारण जिले में हुए मिड-डे मील हादसे की आरोपी प्रिंसिपल मीना देवी की अपील पर सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील के अनुरोध के बाद संबंधित  मामले की सुनवाई की तिथि 17 मई निर्धरित की है. अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एकलपीठ की बजाय खंडपीठ करेगी क्योंकि इस मामले में अभियुक्त को दस वर्ष से अधिक की सजा दी गयी है.



बता दें कि करीब तीन साल पूर्व 16 जुलाई 2013 को मशरक प्रखंड के धर्मसती गंडामन स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद 23 बच्चों की मौत हो गई थी. इस मामले में एक रसोइया व 24 बच्चे एक माह तक पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में इलाजरत रहे थे. इस बहुचर्चित घटना में मृतक आशीष के पिता अखिलानंद मिश्र के बयान पर धर्मसती गंडामन स्कूल की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका मीना देवी और उनके पति अर्जुन राय के खिलाफ मशरक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.

इस मामले में 30 जुलाई 2013 को सरकार ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. घटना के सात दिनों बाद एसआईटी ने मीना देवी को गिरफ्तार कर लिया था जबकि अर्जुन राय ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था. साल 2016 में छपरा व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय आनंद तिवारी ने स्कूल की तत्कालीन प्रिंसिपल मीना देवी को आईपीसी की धारा 304 और 308 के तहत दोषी करार दिया था जबकि उनके पति अर्जुन राय को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था.

ध्वनि प्रदूषण पर राज्य सरकार से जवाब-तलब

राजधानी पटना के मिठापुर स्थित बस स्टैंड में लाउडस्पीकर से हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर पटना उच्च न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को 4 सप्ताह में यह बताने को कहा है कि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आलोक में क्या-क्या कार्रवाई की गयी है. याचिकाकर्ता सूरज सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि मिठापुर स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डा के पास लाउडस्पीकर से काफी मात्रा में ध्वनि प्रदूषण हो रहा है. इस क्षेत्र में विधि विश्वविद्यालय सहित कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं. ध्वनि प्रदूषण के कारण इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है.

एक्सपायरी दवाओं को सड़क पर फेंकने से अदालत नाराज

एक अन्य मामले में सूबे के अस्पतालों में गरीबों को दवा नहीं मिलने और उन दवाओं के एक्पायर होने के बाद सड़क पर फेंकने से नाराज पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिह की खंडपीठ ने इस संबंध में समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को जवाब-तलब किया है.

गौरतलब है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में एक तरफ जहां दवा का अभाव बताकर गरीब मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं दी जाती हैं. वहीं दूसरी ओर बड़ी मात्रा में  दवाओं के भंडार में स्टोर कर रख दिया जाता है तथा बाद में जब वह एक्सपायर हो जाती हैं तो उन्हें सड़क पर फेंक दिया जाता है.

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