‘मिड-डे मिल के लिए शिक्षकों की जगह NGO की सहायता क्यों नहीं लेते?’

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पटना (एहतेशाम) : सूबे के विभिन्न विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में शिक्षकों को लगाने के शिक्षा विभाग के निर्णय को चुनौती देनेवाली लोकहित याचिका पर अदालत ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि वह इस योजना में स्वयंसेवी संगठनों को क्यों नहीं लगाती है. इसके होने से पठन-पाठन बाधित न हो.

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने अकबर अली की ओर से दायर लोकहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में राज्य सरकार द्वारा बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने हेतु मध्याह्न भोजन योजना संचालित कर रही है.

मध्याह्न भोजन योजना में सुबह से ही बच्चों के लिए खाना बनाने का कार्य शुरू हो जाता है और बच्चों को खिलाने की जिम्मेवारी सहित इसके रसद एवं अन्य कार्यों में विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को लगा दिया जाता है. इस कारण वे बच्चों की पढ़ाई की ओर समुचित ध्यान नहीं दे पाते हैं और छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन कार्य बाधित होता है. इसको लेकर करीब 8 हजार शिक्षक हड़ताल पर भी चल रहे हैं. इसे लेकर शिक्षकों की ओर से कई बार सरकार से गुहार लगायी जा रही है, लेकिन स्थिति जस की तस है.

बार काउंसिल चुनाव मामले में जवाब-तलब

बिहार राज्य बार काउंसिल में गत तीन वर्षों से चुनाव नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बार काउंसिल को हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव की ओर से दायर लोकहित याचिका पर गुरूवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार राज्य बार काउंसिल का चुनाव वर्ष 2014 में ही कराया जाना था, जो अब तक नहीं कराया गया है. यह नियमों के विरुद्ध है. वहीं बार काउंसिल के अधिवक्ता द्वारा अदालत को बताया गया कि यह याचिका सुनने योग्य नहीं है, क्योंकि इसी संबंध में एक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है.

निचली अदालतों में मूलभूत सुविधाओं पर शो कॉज

एक अन्य मामले में सूबे की निचली अदालतों में मूलभूत सुविधओं का अभाव और 24 अनुमंडल में बन रहे व्यवहार न्यायालय की प्रगति की जानकारी नहीं मिलने के विरुद्ध दायर लोकहित याचिका पर पटना उच्च न्यायालय ने सूबे के मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन के प्रधान सचिव को अगली सुनवाई में हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खण्डपीठ ने उक्त मामले की सुनवाई गुरुवार को करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे के अनुमण्डल न्यायालयों की स्थिति बद से बदतर है. यह भी बताया गया कि 14वें वित्त आयोग के तहत सूबे के सभी 24 अनुमंडलों में व्यवहार न्यायालय के निर्माण हेतु केन्द्र सरकार द्वारा राशि भी विमुक्त की जा चुकी है, परंतु निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में राज्य सरकार द्वारा कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है.

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