इंटर काॅपी टेंडर घोटाला के मामले में जांच कराये सरकार : हाईकोर्ट

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फाइल फोटो

पटना : पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के बहुचर्चित इंटर काॅपी टेंडर घोटाला के कथित मास्टरमाइंड विकास कुमार के बैंक खाते में प्रिंटिंग प्रेस द्वारा पैसे दिये जाने के बाबत अभियुक्त विकास कुुमार के बैंक खातों की जांच का जिम्मा राज्य सरकार को देते हुए अगली सुनवाई में जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने विकास कुमार की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.



मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गुजरांत के प्रिंटिंग प्रेस बिंदिया इंटरप्राइजेज द्वारा अभियुक्त विकास कुमार के बैंक खाते में पैसा जमा करने का आरोप बेबुनियाद है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को विकास कुमार के बैंक खातों का रिकार्ड देते हुए बताया गया कि प्रिंटिंग प्रेस द्वारा कभी भी इनके बैंक खाते में कोई भी राशि जमा नहीं की गयी है. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे स्वयं अपने स्तर से जांच कर 17 मई की सुनवाई में यह बतायें कि प्रिंटिंग प्रेस द्वारा अभियुक्त के बैंक खाते में राशि जमा करायी गयी है या नहीं.

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जुगाड़ गाड़ी मामले में जवाब देने का निर्देश

राजधनी सहित सूबे के विभिन्न जिलों में बगैर लाइसेंस और परमिट के चल रहे जुगाड़ गाड़ी मामले में पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह की खण्डपीठ ने रोहित कुमार की ओर से दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी पटना सहित गया, मुंगेर, भागलपुर, पूर्णिया, सहरसा, छपरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि जिलों में मोटरसाइकिल को ठेला से जोड़कर जुगाड़ गाड़ी का निर्माण कर बगैर परमिट और लाइसेंस के उपयोग किया जा रहा है. जिससे सरकारी राजस्व की हानि हो रही है वहीं पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है.

सेवा मामलों को लोकहित याचिका मानने से हाईकोर्ट का इंकार

एक अन्य फैसले में बिहार सरकार की स्थानान्तरण नीति को चुनौती देने वाली याचिका को लोकहित याचिका मानने से इंकार करते हुए अदालत ने खारिज कर दिया. अदालत ने साथ ही साथ यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार को कोई नया कानून बनाने के लिए निर्देश नहीं दे सकती है और कोई भी सेवा मामला लोकहित मामला नहीं हो सकता है.

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