पटना हाईकोर्ट ने SSP मनु महाराज से मांगा जवाब, 1 अगस्त को अदालत में हों हाजिर

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पटना (एहतेशाम अहमद) : राजधानी पटना में बीते 3 माह से गायब एक व्यस्क लड़की की गुमशुदगी के मामले में पटना हाईकोर्ट ने एसएसपी मनु महाराज से जवाब तलब किया है. काफी दिन बीत जाने के बावजूद पटना पुलिस की सुस्ती से मामले का उद्भेदन नहीं हो सका है. इससे नाराज हाईकोर्ट ने एसएसपी को आगामी 1 अगस्त को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है.

न्यायाधीश डा. रवि रंजन एवं न्यायाधीश एस. कुमार की खण्डपीठ ने शिवनाथ सिन्हा की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी बेटी तीन माह पहले ट्यूशन पढ़ने गयी थी परंतु उसके बाद वापस नहीं लौटी. विभिन्न जगहों पर खोजबीन के बाद भी जब उसका कहीं अता-पता नहीं चला तो उन्होंने गांधी मैदान थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया. परंतु उसके बाद से थाना का चक्कर लगाने के सिवा और उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पाया है. परिजनों का आरोप है कि पटना पुलिस के सुस्त रवैये के कारण लापता बच्ची का कहीं अता-पता नहीं चल पा रहा है.

पटना AIIMS में 24 घंटे इमरजेंसी क्यों नहीं

एक अन्य मामले में राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 24 घंटे आपातकाल सेवा उपलब्ध कराने में विफल रहने पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए केन्द्र सरकार से चार-सप्ताह के भीतर जवाब-तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने देविका विश्वास की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

अदालत को बताया गया कि राजधानी में AIIMS की स्थापना इसी उद्देश्य के साथ की गयी थी कि बिहारवासियों को 24 घंटा बेहतर चिकित्सकीय सुविधा हासिल हो सके. लेकिन इस अस्पताल में 24 घंटा की चिकित्सकीय सुविधा की बात तो छोड़ दी जाय, न तो यहां ट्रामा सेंटर और ना ही ब्लड बैंक की ही सुविधा है. जिससे आमजनों को आपातकाल में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

जेल में बंद निसहाय कैदियों को दें मदद

सूबे के जेलों में काफी लम्बे अर्से से बंद निसहाय कैदियों को प्रावधानों के तहत कानूनी सहायता उपलब्ध कराने को लेकर दायर लोकहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए बिहार राज्य विधिक प्राधिकार के सचिव से छह सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने संतोष उपाध्याय की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे कली जेलों में गरीब एवं निसहाय कैदी अर्थाभाव के कारण लंबे समय से जेल में बंद है. जबकि ऐसे निसहाय कैदियों को बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से निःशुल्क विधिक सहायता दिये जाने का प्रावधान है.

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