मुश्किल में फंसे लालू की पालिटिकल नैया पार करायेंगे प्रशांत किशोर !

PRASHANT-KISHOR

नई दिल्‍ली : पालिटिकल कारीडोर में तेज चर्चा है. बिहार में भाजपा के साथ सरकार बनाते ही मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार ने पोल स्‍ट्रेटजिस्‍ट प्रशांत किशोर को हटा दिया. सरकारी पद व सुविधाएं खत्‍म कर दी गई. कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार से भाजपा के साथ चले जाने की कतई उम्‍मीद नहीं थी. 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में महागठबंधन की विशाल जीत का ‘चाणक्‍य’ प्रशांत किशोर को ही माना गया था.

बिहार की जीत ने प्रशांत किशोर की इमेज बहुत बड़ी कर दी. लेकिन उत्‍तर प्रदेश चुनाव में प्रशांत किशोर उर्फ पीके कोई करिश्‍मा नहीं कर पाये. हां,पंजाब में कांग्रेस को जरुर जीत मिली. लेकिन कांग्रेस नेतृत्‍व पंजाब की जीत का पूर्ण श्रेय पीके की स्‍ट्रेटजी को देने को तैयार नहीं है. 2014 के लोक सभा चुनाव के बाद अमित शाह से खुन्‍नस बढ़ने के बाद पीके भाजपा खेमे से बाहर निकल आये थे. कहा जाता है कि बिहार के चुनाव में उन्‍होंने अपनी भूमिका बदला साधने के लिए तय की थी. दूसरे फैक्‍टर सेकेंडरी थे. अभी वे साउथ में बिजी हैं.

PRASHANT-KISHOR

नीतीश कुमार के भाजपा के साथ जाने की खबरों से परेशान पीके को लालू प्रसाद के करीब जाते हुए माना गया है. खबर है कि लालू प्रसाद ने संपर्क किया है. वे चाहते हैं कि बिहार आकर राजद की स्‍ट्रेटजी तय करें. विधान सभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के वक्‍त लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच पीके ही सेतु का काम कर रहे थे. जब बात फंसती थी,राह पीके निकालते थे. बंटवारे से आगे भाषण की स्‍ट्रेटजी तय की. जब नरेन्‍द्र मोदी ने नीतीश कुमार के डीएनए के बारे में कहा,तो पीके ने तय प्रहार के तहत इसे बिहार की भावनाओं से जोड़ भाजपा विरोधी माहौल बना दिया था.

प्रशांत किशोर बिहार के ही बक्‍सर के रहने वाले हैं. सो,उनका लगाव विशेष रुप से बिहार में है. खबरों के मुताबिक राजद के साथ बातचीत जारी है,पर टीम पीके का अंतिम निर्णय अभी बाकी है. पीके की तरह राजद में अभी लालू प्रसाद और तेजस्‍वी यादव के लिए सोशल मीडिया सेक्रेटेरिएट को संभालने का काम संजय यादव करते हैं,जो मूल रुप से हरियाणा के रहने वाले हैं.