एक बार फिर BJP के खिलाफ उतरने को तैयार हैं प्रशांत किशोर

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लाइव सिटीज डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में और फिर नीतीश कुमार को बिहार विधानसभा में जीत दिलाने में अहम् भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर को अब एक और नया क्लाइंट मिल गया है. उत्तर भारत की राजनीति में अपनी पहचान स्थापित करने के आबाद प्रशांत किशोर अब दक्षिण भारत का रुख कर रहे हैं. उन्हें आंध्र प्रदेश में विपक्ष के नेता जगन मोहन रेड्डी की ओर से बुलावा आया है.

बताया जा रहा है कि प्रशांत को जगन मोहन रेड्डी ने आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस का प्रदर्शन सुधारने के लिए अपना विशेष सलाहकार बनाया है. आन्ध्र में अभी चन्द्र बाबू नायडु की पार्टी टीडीपी की सरकार है. टीडीपी यहां भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रही है. यह भी जानकारी मिल रही है कि जगन मोहन रेड्डी ने बीते बुधवार को ही अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रशांत किशोर का परिचय करा दिया है. आंध्र प्रदेश में 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे.

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फाइल फोटो

कांग्रेस के साथ खट्टा-मीठा रहा था अनुभव

प्रशांत किशोर बिहार में जदयू के लिए चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने और फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने के बाद कांग्रेस से जुड़े थे. कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश-पंजाब के विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने की अहम् जिम्मेदारी सौंपी थी. हालांकि उत्तर प्रदेश में तो कांग्रेस को सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह वापस सत्ता में आने में कामयाब रहे. प्रशांत के ऊपर अब एक बार फिर भाजपा के ख़िलाफ़ अपने चुनावी कौशल के बल पर जगन मोहन को आंध्र प्रदेश में सत्ता दिलाने की चुनौती है.

2014 में सुर्ख़ियों में आये प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर सुर्खियों में तब जाए जब 2014 में उन्हें भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेन्द्र मोदी के पक्ष में प्रचार करने का श्रेय दिया गया. कहा गया कि प्रशांत किशोर ने ही मोदी के हाई-टेक प्रचार अभियान की बुनियाद रखी और इससे जोर शोर से सोशल मीडिया पर लॉन्च किया. मोदी के चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर की उनसे नहीं पटी और उन्होंने अपना रास्ता अलग कर लिया. प्रशांत इसके बाद मोदी के विरोधी बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ जुड़ गये.

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बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के लिए ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ जैसे अनोखे नारे को गढ़ा. नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर के काम का इनाम दिया और उन्हें बिहार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया. उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भी प्रशांत किशोर अहम रोल में रहे. उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के लिए राजी किया. हालांकि उत्तर प्रदेश में अमित शाह की रणनीति के आगे प्रशांत किशोर फेल साबित हुए. लेकिन पंजाब में उन्होंने कांग्रेस को जीत दिलवाई.

आंध्र की राह नहीं आसान

आंध्र प्रदेश में प्रशांत किशोर के सामने चुनौती दोहरी है. यहां पार्टी के मुखिया 44 साल के जगन मोहन रेड्डी पर भ्रष्टाचार का आरोप है. इसके अलावा पार्टी का भी प्रदर्शन पिछले चुनाव में ठीक नहीं रहा है. प्रशांत किशोर के सामने इस चुनौती से पार पाने का दायित्व है. आंध्र प्रदेश में 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे.

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