EXCLUSIVE : देख लें सबूत, इंटर की कापियां जांची थी प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों ने

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पटना : लाइव सिटीज बगैर साक्ष्य के कोई बात नहीं करता. 30 मई को जब बिहार बोर्ड के बारहवीं के नतीजे बहुत खराब आये, हंगामा तभी से शुरु हो गया था. अब भी चल रहा है. पहले दिन से कहा जाता रहा कि उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच में बड़ा घालमेल हुआ है. परिणाम यह कि ऐसे छात्र भी इंटर की परीक्षा में फेल हो गए हैं, जिन्होंने IIT मेंस की परीक्षा भी पास कर ली है. ऐसा कैसे हुआ, बिहार के समक्ष बड़ा सवाल है. आरोप नतीजे के बाद से ही है कि इंटर की कापियां प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों से भी जंचवाई गई थी. निश्चित तौर पर ये शिक्षक इंटर की कापियां नहीं जांच सकते थे. लेकिन सरकार ने सेकेंडरी शिक्षकों की हड़ताल के नाम पर ऐसा कराया. कहा गया कि समय पर नतीजे देने है.

ये हैं सबूत

लाइव सिटीज की इन्वेस्टीगेशन टीम आज शनिवार आपको दिखा रही  है वह सच, जो यह साबित करता है कि इंटर की कापियां प्राथमिक शिक्षकों ने जांची है. आप तस्वीरों को देखकर संतुष्ट होंगे. जिला शिक्षा पदाधिकारी, पटना का आदेश (फोटो – 1) में देखें. बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के 10 अप्रैल और 12 अप्रैल 2017 के आदेश का हवाला है. इस आदेश के तहत प्राथमिक शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति मैट्रिक/इंटर के कापियों की जांच के लिए की जा रही है.

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फोटो – 1

प्रतिनियुक्त किये गए शिक्षकों की लिस्ट बहुत लंबी है. कई पृष्ठों में है. फोटो-2 में कुछ और नाम आपको दिख रहे होंगे. जिला शिक्षा पदाधिकारी, पटना अपने आदेश (फोटो – 1)  में कह रहे हैं कि विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त सरकारी/गैर सरकारी/प्राथमिक/मध्य एवं उच्च विद्यालयों के स्नातक (ग्रेजुएट) योग्यताधारी शिक्षकों को मैट्रिक एवं स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) शिक्षकों को इंटर की उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच के लिए मूल्यांकन केन्द्रों पर प्रतिनियुक्त किया जा रहा है.

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लाइव सिटीज के पास उपलब्ध जिला शिक्षा पदाधिकारी, बांका का कार्यालय आदेश (फोटो-3) भी यह दर्शा रहा है कि प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षकों को इंटर की कापियां जांचने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है. अब सवाल यह है कि प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षक चाहे ग्रेजुएट/पोस्ट ग्रेजुएट ही क्यों न हों, क्या वे इंटर की कापियां जांचने के लिए योग्य हैं? दुनिया के किसी भी विशेषज्ञ से सवाल करेंगे, आपको जवाब सिर्फ और सिर्फ नहीं में मिलेगा.

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ऐसे होगी इंटर की कॉपी जांच?

आपने कभी आसपास कहीं ये सुना है कि प्राथमिक/मध्य विद्यालय के शिक्षक उंची कक्षाओं के छात्रों को ट्यूशन भी पढ़ा रहे हैं. नहीं मिलेगा कोई उदाहरण. दरअसल, व्यवहारिक सच ही ये है कि व्यक्ति चाहे वो शिक्षक ही क्यों न हो, जो रोज करता है, ठीक से उतना ही कर पायेगा. अब क्या, आप ये सोच सकते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज का कोई प्रोफ़ेसर किसी चौथी-पांचवीं कक्षा के स्टूडेंट की कॉपी जांच देगा. बिलकुल नहीं, क्योंकि वह इससे बहुत अधिक आगे जा चुका है. चौथी-पांचवीं कक्षा के स्टूडेंट की कॉपी उसके टीचर ही ठीक से जांच सकते हैं.

बिहार में प्राथमिक और मध्य विद्यालय के सरकारी/गैर सरकारी शिक्षकों को इंटर की कॉपी जांचने की जिम्मेवारी तब दे दी गई, जबकि उनके रिकॉर्ड बहुत खराब रहे हैं. ये शिक्षक बड़ी संख्या में अहर्ता परीक्षा में फेल होते रहे हैं. लाइव सिटीज के पास पटना हाई कोर्ट के आदेश के कई दस्तावेज हैं, जब कोर्ट ने अहर्ता परीक्षा में पास न करनेवाले शिक्षकों को नौकरी से हटा देने के लिए कहा. यह तब कहा गया, जब एक से अधिक बार शिक्षक मामूली सवालों वाले अहर्ता परीक्षा में फेल हुए थे.

हाई कोर्ट ने भी की है कार्रवाई

अप्रैल 2015 में पटना हाई कोर्ट ने 3000 शिक्षकों की नौकरी खत्म करने का आदेश दिया. इसके पहले 2012 में भी शिक्षक बर्खास्त किये गए थे. 2013 में कुल 10 हजार शिक्षक अहर्ता परीक्षा में फेल हुए थे. ऐसे शिक्षकों की संख्या बिहार के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में आज भी कम नहीं है. तो फिर सवाल तो सवाल ही बना रहेगा कि इन शिक्षकों ने इंटर की कापियां कैसे जांची होगी. रिजल्ट खराब हुआ तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शिक्षा विभाग के अजीबोगरीब निर्णयों को जान सके. लेकिन, परेशान लाखों-लाख छात्र क्या करें, वे समझ नहीं पा रहे हैं. भविष्य पर ही ग्रहण लगा हुआ है.

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