BIG BREAKING : रात को मिले लालू प्रसाद और उपेन्‍द्र कुशवाहा, मांझी पर भी हुई बात

पटना : बिहार की राजनीति बहुत तेज हो रही है. लालू प्रसाद की नई सर्वोच्‍च प्रायोरिटी नीतीश कुमार की शिकस्‍त है. इसके लिए वे अब किसी भी समझौते और फार्मूले को तैयार हैं. तेजस्‍वी यादव को लेकर जिद भी समाप्‍त कर रहे हैं. इसी कड़ी में सोमवार की रात लालू प्रसाद और रालोसपा प्रमुख उपेन्‍द्र कुशवाहा की लंबी मुलाकात हुई है. मुलाकात कंफर्म है, पर दोनों पार्टी के नेता कुछ नहीं बोलेंगे. रणनीति है.

उपेन्‍द्र कुशवाहा न सिर्फ रालोसपा के प्रमुख हैं, बल्कि केन्‍द्र की नरेन्‍द्र मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राज्‍य मंत्री भी हैं. 2014 का लोक सभा और 2015 का विधान सभा चुनाव रालोसपा ने एनडीए के घटक दल के रुप में लड़ा था. लोक सभा में रालोसपा ने तीन सीटें जीती थी,जिसमें जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार अभी बागी हो गये हैं. बिहार में महागठबंधन की सरकार खत्‍म होने के बाद जब जुलाई 2017 में एनडीए की नई सरकार बनी,तो नीतीश कुमार ने रालोसपा के विधायक को मंत्री नहीं बनाया. लोजपा खाते से पशुपति नाथ पारस बगैर विधायक बने मंत्री बन गये,जिन्‍हें अब बिहार विधान परिषद का सदस्‍य राज्‍यपाल के द्वारा मनोनीत किया जा चुका है.

लालू प्रसाद-उपेन्‍द्र कुशवाहा की गोपनीय मुलाकात की खबर रखने वाले जानकार बता रहे हैं कि बात बहुत ठीक रही. जीतन राम मांझी को लेकर भी चर्चा हुई. मांझी एनडीए में उदास चल रहे हैं. कहा जाता है कि लालू प्रसाद उनके एडजस्‍टमेंट का रास्‍ता निकालने को तैयार हैं. आपको बता दें कि सोमवार को सबसे पहले लाइव सिटीज ने ही बताया था कि उपेन्‍द्र कुशवाहा के भविष्‍य के लिए एनडीए में भले वैकेंसी न हो,पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के दिल में है. कुशवाहा ने संडे को पटना के गांधी मैदान में शिक्षा सुधार संकल्प महासम्मेलन का आयोजन भी किया था.

लालू प्रसाद अपने साथ उपेन्‍द्र कुशवाहा को लेकर नई सोशल इंजीनियरिंग को गढ़ने में लगे हैं. उनका मानना है कि माय (मुसलमान संग यादव) समीकरण में कोइरी वोट जुड़ जाए,तो राह बहुत आसान हो जाएगी. उपेन्‍द्र कुशवाहा मुख्‍य मंत्री पद के दावेदार बनना चाहते हैं. लालू प्रसाद के लोगों ने भी कहना शुरु किया है कि जब नीतीश कुमार को लीडर मान सकते थे,तो फिर उन्‍हें हराने के लिए उपेन्‍द्र कुशवाहा को मान लेने में कौन-सा पहाड़ टूट जाएगा. तेजस्‍वी की उम्र अभी कम है,उनके लिए भविष्‍य का रास्‍ता सदैव खुला रहेगा.

बिहार में कोइरी वोटों की संख्‍या करीब 6 प्रतिशत है. सभी कोइरी नेताओं को रालोसपा में साथ लेने की मुहिम पर उपेन्‍द्र कुशवाहा पहले से काम कर रहे थे. धुर विरोधी भगवान सिंह कुशवाहा और नागमणि को उपेन्‍द्र कुशवाहा ने अपने संग लाया. महाबली सिंह की तैयारी थी,पर नीतीश कुमार जैसे ही एनडीए के साथ हुए,महाबली सिंह ने अपना प्‍लान बदल लिया. उधर भाजपा ने कुशवाहा पालिटिक्‍स को ध्‍यान में रखते हुए सम्राट चौधरी को अपने साथ कर लिया था.

उपेन्‍द्र कुशवाहा को पता है कि उन्‍हें लालू प्रसाद के साथ चलने को सबसे पहले केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद से इस्‍तीफा देना होगा. फिर खुली राजनीति होगी. लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद उपेन्‍द्र कुशवाहा आज मंगलवार को नई दिल्‍ली वापस हो गये हैं.