शिक्षकों को हटाये जाने के निर्णय पर नीतीश के पक्ष में खड़े हो गये हैं कुशवाहा

पटना : रालोसपा अध्‍यक्ष व केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री उपेन्‍द्र कुशवाहा पोलिटिकल गलियारे में बढ़े कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार से मिले. मुलाकात को शिष्‍टाचार भेंट कहा है उपेन्‍द्र कुशवाहा ने. दोनों की मुलाकात न सिर्फ बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद पहली बार हुई है,बल्कि यह बहुत अर्से के बाद की भेंट वार्ता है.

मुलाकात के बाद भी कुशवाहा बहुत खुलने को तैयार नहीं हैं. इस पर कुछ नहीं बोले कि रालोसपा को बिहार मंत्रिपरिषद में जगह मिल रही है कि नहीं. बिहार की सरकार में एनडीए के शामिल होने के बाद जब मंत्रिपरिषद का निर्माण हुआ,तो नीतीश कुमार ने बगैर विधायक बने पशुपति कुमार पारस को तो लोजपा कोटे से मंत्री पद दे दिया,लेकिन रालोसपा को जगह नहीं दी. रालोसपा विधायक का नाम अंतिम समय में कटा. तब के दिन कुशवाहा पटना में ही थे. नाराज चल रहे जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी को भी अब किसी बोर्ड में सामंजित करने की बात चल रही है.

मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद उपेन्‍द्र कुशवाहा ने सबसे पहले शिक्षकों के बारे में आज गुरुवार को ही लिए गए नीतीश कुमार के फैसले का स्‍वागत कर दिया. सरकार ने बेहतर न करने वाले 50 साल से अधिक के शिक्षकों को जबरिया रिटायर कराने का फैसला किया है.

कुशवाहा ने इस पर अपनी टिप्‍पणी में कहा कि नीतीश कुमार का निर्णय बिलकुल ठीक है. अक्षम शिक्षकों को हटा दिया जाना चाहिए. यह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में बिहार सरकार का बड़ा कदम होगा.

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